नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं का पाला बदलने का दौर शुरू हो चुका है। इस बीच उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा के असंतुष्ट नेताओं को साधने की पूरी कोशिश में लगी है। हाल-फिलहाल योगी सरकार के बड़े कद्दावर मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य पर डोरा डाला जा रहा है। अगर बातचीत सफल रही तो 22 नवम्बर को मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर बड़ा धमाका हो सकता है।
बतादें कि स्वामी प्रसाद मौर्य अन्य पिछड़ी जातियों खासकार मौर्य समुदाय के बड़े नेता हैं। वे 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। हालांकि योगी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और उनकी बेटी संघमित्रा बदायूं से भाजपा की लोकसभा सांसद हैं। बावजूद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के ज्यादा प्रभावी होने के चलते स्वामी को पार्टी व सरकार में वह मुकाम नहीं मिल पाया जिसकी उम्मीद लेकर वे भाजपा में आए थे। इसी का फायदा उठाने के लिए सपा अब उन पर डोरे डाल रही है।
सूत्र बताते हैं कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ उनकी बातचीत चल रही है। एक दौर की मुलाकात हो चुकी है। लेकिन अंतिम फैसले से पहले कई मुद्दे सुलझाने होंगे। मसलन बदायूं लोकसभा सीट धर्मेंद्र यादव की परम्परागत सीट है,जिस पर इस बार भाजपा के टिकट से स्वामी प्रसाद की मौर्य की बेटी संघमित्रा जीतकर संसद पहुंची हैं। स्वामी इस सीट को छोडऩा नहीं चाहते हैं। इसके अलावा तकरीबन 2 दर्जन अन्य सीटों की भी वे मांग कर रहे हैं जिसमें वे अपने बेटे के लिए भी एक सुरक्षित सीट चाह रहे हैं।