New Delhi News : तूं डाल-डाल, मैं पात-पात : काम अपराध का, लेकिन तरीका बेहद दिलचस्प
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 04:04 PM
New Delhi : नई दिल्ली। तूं डाल-डाल, मैं पात-पात। ये कहावत (Proverb) तो आपने सुनी ही होगी। अपराधियों (criminals) को पकड़ने के लिए पुलिस (Police) नित नई तकनीकी (new technology) का इस्तेमाल करती है, लेकिन अपराधी उस तकनीक को तोड़ निकाल ही लेते हैं। पैसे कमाने के लिए ठगी का धंधा इन दिनों सबसे मुफीद है। इसके लिए एक से बढ़कर एक नायाब तरीके अपनाए जा रहे हैं। काम अपराध का होता है, लेकिन तरीका बेहद दिलचस्प होता है। ऐसे ही ठगी के एक मामले का खुलासा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने किया है। इसमें ट्रेन टिकट एग्जामिनर (टीटीई) की ट्रेनिंग देने वाले और लेने वाले दोनों की नकली थे। रेलवे पुलिस ने पांच नकली टीटीई को गिरफ्तार कर रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पांचों के मोबाइल फोन में नकली आइ-कार्ड व रेलवे के नियुक्ति पत्र मिले हैं। गिरफ्तार आरोपितों में गिरोह का एक सदस्य भी है।
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डीसीपी (रेलवे) हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मोहम्मद रिजवान, भूपेंद्र चौरसिया, गगनदीप सिंह, गौरव कुमार और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के सदस्य नौकरी का झांसा देकर युवाओं को नई दिल्ली स्टेशन लाते थे और यहां फर्जी तरीके से प्रशिक्षण दिया जाता था। इन युवाओं से लाखों रुपये वसूलकर उन्हें नकली नियुक्ति पत्र व आई-कार्ड थमाकर ट्रेनों में चेकिंग के लिए भेज दिया जाता था। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस में एक रेलवेकर्मी द्वारा नकली टीटीई को रोका गया। वह युवक टीटीई की वर्दी पहने था और उसके मोबाइल फोन में आई-कार्ड भी था। शक होने पर रेलवेकर्मी ने इसकी सूचना मुख्य टिकट निरीक्षक को दी। आरपीएफ ने उसे पकड़कर जांच के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन थाना पुलिस को सौंप दिया। उसकी पहचान भूपेंद्र चौरसिया के रूप में हुई।
पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि उसे प्रशांत शुक्ला नाम के व्यक्ति ने आई कार्ड दिया था, जिसे रेलवे में नौकरी पाने के लिए उसने पैसे दिए थे। उसके जैसे कई अन्य युवक नई दिल्ली स्टेशन पर प्रशिक्षण ले रहे हैं। मोहम्मद रिजवान नाम का शख्स उनका प्रभारी है, जो उनकी उपस्थिति दर्ज करता है। भूपेंद्र पुलिस को अजमेरी गेट की तरफ केएफसी के तरफ एक व्यक्ति के पास ले गया, जो टीटीई की वर्दी में था। उसने खुद को रिजवान बताया और टीटीई का ट्रेनर होने की बात कही। उसके मोबाइल फोन में भी नकली आई-कार्ड था। रिजवान ने बताया कि उसने संदीप नाम के शख्स को नौकरी के लिए दो लाख दिए थे। संदीप ने उसे अन्य प्रशिक्षुओं की उपस्थिति प्राप्त करने और उनका प्रशिक्षण संचालित करने का काम सौंपा था। उसकी सूचना पर तीन और नकली टीटीई को पकडा गया है। उनकी पहचान गौरव कुमार, गगन दीप सिंह और अमनदीप सिंह के रूप में हुई।