New Delhi: दिल्ली के हिंदी भवन में हुआ उपन्यास ‘न्याय की तलाश’ का विमोचन
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 08:29 AM
New Delhi: नई दिल्ली। भारतीय न्याय व्यवस्था को केंद्र में रखकर डॉ. चिरोंजी लाल यादव द्वारा लिखित उपन्यास ‘न्याय की तलाश’ का भव्य विमोचन किया गया। इसके बाद दिल्ली के हिंदी भवन में अंतरराष्ट्रीय शब्द सृजन के बैनर तले काव्य संध्या का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित सभी काव्य मनीषियों को संस्था की ओर से सहभागिता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार पद्मश्री डॉ श्याम सिंह श्शशिश् ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह उपन्यास कला के लिए तथा समीक्षकों के पूर्वाग्रही वाग्जाल से बचते हुए सब कुछ कह जाता है, जो हमारे देश समाज के लिये अभीष्ट है, अपितु वैश्विक शांति की न्याय प्रिय यूएनओ जैसी संस्थाओं के लिए भी दिशा बोधक है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ हरिसिंह पाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था पर लिखा गया अपने तरह का पहला उपन्यास है। न्याय व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए हल भी प्रस्तुत करता है। इसलिए यह उपन्यास सुखांत की श्रेणी में आता है। उपन्यास कार ने न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाए जाने के लिये भी मार्गदर्शन किया है।
मैनपुरी से पधारे कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य ने उपन्यास के तत्वों के आधार पर तात्विक समीक्षा करते हुए कहा कि आधुनिक परिदृश्य में यह उपन्यास ग्रामीण अंचल की पृष्ठभूमि से उठाया गया है। इसलिए इसे आंचलिक उपन्यास की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। कथावस्तु, पात्र चरित्र चित्रण, भाषा शैली, संवाद योजना, शैली आदि कथा के अनुरूप है। यही एक सफल उपन्यासकार की पहचान है। डॉ. चिरोंजी लाल यादव का यह दूसरा उपन्यास है। कथा साहित्य को इनसे काफी अपेक्षाएं हैं।
जर्मनी के बर्लिन शहर से विशिष्ट अतिथि के रूप में आईं साहित्यकार हेल्थ प्रेक्ष कम्पनी की सीईओ डॉ. योजना साह जैन ने ‘न्याय की तलाश’ उपन्यास की मुक्त कंठ से प्रसंशा करते हुए कहा कि लेखक के व्यक्तित्व की झलक उसके कृतित्व में स्वतः आ जाती है। जो जीवन में देखता है, वही उसके द्वारा उद्घाटित किया जाता है। साथ ही अपने कविता पाठ से मंत्रमुग्ध कर दिया।
संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार पाण्डेय ने संस्था का परिचय देते हुए कहा कि साहित्य एवं संस्कृति के लिए समर्पित वैश्विक संस्था है, जिसकी 15 देशों एवं भारत के 22 राज्यों में शाखाएं हैं, जो हिंदी के लिए कार्य कर रहीं हैं।
महासचिव ओंकार त्रिपाठी ने उपन्यासकार को काव्यात्मक शुभकामनाएं दीं और कहा कि डॉ. चिरोंजी लाल यादव में कथा साहित्य की अपार संभावनाएं हैं। न्याय की तलाश निश्चित रूप से हमारी न्याय व्यवस्था को नए सिरे से सोचने को बाध्य करेगा।
इस अवसर पर अतिथियों का पुष्प माला, शॉल, प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कोषाध्यक्ष अनुपमा पाण्डेय भारतीय, संगठन मंत्री ब्रज माहिर, सह संगठन मंत्री रजनीश स्वछंद, महिला इकाई की अध्यक्ष कुसुमलता कुसुम द्वारा स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। प्रकाशक पराग कौशिक का भी इस अवसर पर अभिनन्दन किया गया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें मुंबई से डॉ. रोशनी किरण, बनारस से महेंद्र अलंकार, भाटापारा छत्तीसगढ़ से ललित सिंह ठाकुर, दिल्ली एनसीआर से डॉ. ज्योति उपाध्याय, डॉ. पूनम माटिया, तूलिका सेठ, उपेन्द्र फतेहपुरी, भूप सिंह यादव, महेश चंद्र शर्मा, मुक्ता मिश्रा, चांदनी केसरवानी, डॉ. अंजू अग्रवाल, सविता सिंह, रीता जयहिन्द, राधा गोयल, अंजना शर्मा, मनीषा जोशी, डॉ. साक्षात भसीन, बबिता राणा, मीनाक्षी दिनेश, विभा राज वैभवी, सुनीता पूनिया आदि कवि एवं कवियत्रियों ने काव्य रस धारा में श्रोेताओं को डुबो दिया। कार्यक्रम के अंत में कवियों को सहभागिता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। सभी अतिथियों ने देवी सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कुसुमलता कुसुम ने सरस्वती वंदना का पाठ किया। डॉ. राजीव पाण्डेय ने मंच का संचालन किया। ओंकार त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।