कल संसद में पेश होगा नया टैक्स बिल, जानिए आपके लिए क्या होगा नया?
भारत
चेतना मंच
27 Nov 2025 11:36 PM
केंद्र सरकार 11 अगस्त (सोमवार) को नया इनकम टैक्स बिल 2025 (New Income Tax Bill 2025) संसद में पेश करने जा रही है। इस बिल को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं क्योंकि यह मौजूदा टैक्स कानूनों को अधिक सरल, स्पष्ट और व्यवहारिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। संसदीय सेलेक्ट कमेटी ने इस बिल को लेकर अपनी रिपोर्ट पहले ही लोकसभा में पेश कर दी है जिसमें 566 सुझावों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट 4,584 पेज की है और इसका मुख्य उद्देश्य आयकर व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाना है। आइए जानते हैं इस बिल से जुड़े 10 बड़े सुझाव जो आपकी जेब और कर व्यवस्था पर सीधा असर डाल सकते हैं। New Income Tax Bill 2025
न्यू इनकम टैक्स बिल से जुड़े 10 बड़े बदलाव
परिभाषाओं को स्पष्ट करें: कमेटी ने सुझाव दिया है कि कानून में प्रयुक्त शब्दों की परिभाषाएं अधिक स्पष्ट और सरल बनाई जाएं ताकि भ्रम की स्थिति ना बने।
285 सुधारों पर जोर: बिल को आसान बनाने और मौजूदा टैक्स सिस्टम के साथ बेहतर तालमेल बैठाने के लिए कमेटी ने 285 सुझाव दिए हैं।
स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी: रिपोर्ट में कहा गया है कि आम करदाताओं और उद्योगों से मिले सुझावों के आधार पर कई जरूरी सुधार प्रस्तावित हैं।
566 सिफारिशें शामिल: कुल मिलाकर कमेटी ने 566 पॉइंट्स में सुधार सुझाए हैं जो आयकर अधिनियम के विभिन्न पहलुओं को कवर करते हैं।
लेट ITR पर रिफंड का नियम हटे: एक बड़ा सुझाव यह है कि अगर ITR देर से भी फाइल की जाए तो भी टैक्स रिफंड मिल सके। वर्तमान में समय से न भरने पर रिफंड नहीं मिलता।
धारा 80M में बदलाव: खासकर उन कंपनियों के लिए जो इंटर-कॉर्पोरेट डिविडेंड से कमाती हैं, उनके लिए कर राहत से जुड़े बदलाव की सिफारिश की गई है।
Zero TDS Certificate की अनुमति: करदाताओं को बिना कटौती (Zero TDS) का सर्टिफिकेट लेने की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है।
टैक्स रेट में बदलाव नहीं: आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि टैक्स स्लैब या दरों में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है, हालांकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स पर चर्चाएं जरूर थीं।
MSME की परिभाषा में बदलाव: माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज की परिभाषा को MSME एक्ट के अनुसार तय करने की बात कही गई है।
रूलिंग फीस, टीडीएस और पेनल्टी पर स्पष्टता: अडवांस रूलिंग फीस, प्रोविडेंट फंड पर टीडीएस और टैक्स पेनल्टी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बिल में अधिक पारदर्शिता की सिफारिश की गई है।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बिल का मकसद टैक्स नियमों को आसान, प्रभावी और आम जनता के लिए ज्यादा समझदार बनाना है। यह कदम डिजिटल इंडिया और पारदर्शिता की दिशा में एक और मजबूत प्रयास माना जा रहा है। बिल 11 अगस्त को संसद में पेश होगा और उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ हफ्तों में इसे मंजूरी मिल सकती है।