भारत में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है। डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और मोबाइल से होने वाले कॉन्टैक्टलेस (Tap to Pay) भुगतान ने लेनदेन को आसान बनाया है।

Tech News : भारत में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है। डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और मोबाइल से होने वाले कॉन्टैक्टलेस (Tap to Pay) भुगतान ने लेनदेन को आसान बनाया है। लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाने के लिए साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। हाल के दिनों में NFC (Near Field Communication) स्कैम को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर वायरल दावा सही नहीं होता और वास्तविक खतरा किन परिस्थितियों में होता है।
NFC यानी Near Field Communication एक शॉर्ट-रेंज वायरलेस तकनीक है, जिसके जरिए दो डिवाइस बेहद कम दूरी (आमतौर पर 4 सेंटीमीटर या उससे कम) पर डेटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इसी तकनीक के जरिए डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, स्मार्टफोन या स्मार्टवॉच से Tap to Pay भुगतान किया जाता है।
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साइबर अपराधी ऐसे लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं जिनके कार्ड या मोबाइल में कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सुविधा सक्रिय होती है। कुछ मामलों में अपराधी विशेष NFC डिवाइस या सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर कार्ड या मोबाइल से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। हाल के समय में ऐसे हमलों में फर्जी ऐप इंस्टॉल करवाकर पीड़ित से कार्ड टैप कराने या मोबाइल की NFC सेटिंग बदलवाने जैसी तरकीबें भी सामने आई हैं।
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छोटी राशि के कुछ कॉन्टैक्टलेस ट्रांजैक्शन में OTP या PIN की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति दूर से आपके खाते से आसानी से पैसे निकाल सकता है। आधुनिक भुगतान प्रणाली में कई सुरक्षा परतें होती हैं और अधिकांश धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी ऐप या अन्य तकनीकों का सहारा लेते हैं।
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NFC तकनीक अपने आप में सुरक्षित मानी जाती है और इसमें कई सुरक्षा उपाय शामिल होते हैं। जोखिम तब बढ़ता है जब उपयोगकर्ता फर्जी कॉल, संदिग्ध ऐप या साइबर अपराधियों के झांसे में आ जाता है। इसलिए थोड़ी सी सावधानी और डिजिटल जागरूकता आपको ऐसे स्कैम से बचा सकती है।
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