Nirbhaya Case: 16 दिसंबर की रात हुई भयानक घटना से हिल गया था पूरा देश, आज पूरे हुए वीभत्स केस के दस साल
भारत
चेतना मंच
16 Dec 2022 05:35 PM
दस साल पूर्व देश की राजधानी में हुए Nirbhya Case के आज दस वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन आंकड़े यह बताते हैं कि इस घटना के बाद रेप केसेस में ज्यादा कमी देखने को नहीं मिल रही है और दिल्ली को आज भी महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा बेहतर शहर नहीं माना जाता है। घटना के सात साल के बाद न्याय मिलने और निर्भया की माँ की एक लम्बी लड़ाई लड़ने की यह कहानी आज भी देश के हर एक व्यक्ति को याद है। 16 दिसंबर के दिन की यह घटना इस दर्दनाक काण्ड के जख्मों को आज भी ताज़ा कर देती है।
क्या था निर्भया केस और क्या नये बदलाव देखने को मिले इस केस में?
घटना (Nirbhya Case) 16 दिसंबर की रात की थी जब निर्भया अपने एक दोस्त के साथ "लाइफ ऑफ़ पाइ" नाम की मूवी देख कर वापस लौट रही थी। दोनों लोग मुनरीका से द्वारका जाने के लिए ऑटो का इंतज़ार कर रहे थे लेकिन तभी एक बस के रुकने पर वे उसमें सवार हो गए। कुछ पलों के बाद ही उन्हें महसूस हो गया था कि बस में मौजूद 6 लोगों के इरादे ठीक नहीं हैं। उन्होंने निर्भया के साथ छेड़खानी शुरू कर दी और उसके मित्र के द्वारा विरोध किये जाने पर उन्होंने रॉड मार कर उसे बेहोश कर दिया।
इसके बाद भी उनके गलत इरादों का खात्मा नहीं हुआ और वे निर्भया को पीछे की सीट पर ले कर गए जहाँ उन्होंने रेप जैसी घिनौनी घटना को अंजाम दिया। यह घटना (Nirbhya Case) इतनी ज्यादा वीभत्स थी कि निर्भया के पेट की आंतें बुरी तरह से डैमेज हो चुकी थीं। सिंगापुर के बड़े हॉस्पिटल में ईलाज हेतु भेजने पर भी वो जिंदगी से अपनी जंग हार गयी।
निर्भया के अचेत होने और उसके मित्र के भी बुरी तरह चोटिल होने के कारण पहली बार केस का ब्यान इशारों के जरिये लिया गया। निर्भया के न रहने के बाद भी उनकी माँ ने बहादुरी से Nirbhya case से जुड़ी न्याय की लड़ाई लड़ी और 6 आरोपियों को सजा हुई जिनमें से ड्राइवर राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली। बाकी के चार आरोपियों का ट्रायल पूरा हुआ। घटना ने एक नाबालिग भी शामिल था जिसके लिए अन्य चार आरोपियों से अलग सजा का प्रावधान अपनाया गया।