NIRF Ranking: जानिए कौनसे हैं 2021 के शीर्ष शिक्षा संस्थान
NIRF Ranking
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 01:45 AM
शिक्षा मंत्री डॉ. धर्मेन्द्र प्रधान एवं शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, डॉ. सुभाष सरकार डॉ. राजकुमार रंजन सिंह द्वारा कुछ ही देर पहले एनईआरएफ (नैशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) यानी राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों की रैंकिंग वेबकास्ट के मध्यम से जारी कर दी गई है।
यह रैंकिंग 2015 से प्रारंभ हुई और 2016 से हर वर्ष इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, मेडिकल, लॉ, आर्किटेक्चर और डेंटल क्षेत्रों में निकली जाति है। इसमें सर्वोच्च विश्वविद्यालय और कॉलेज अलग से बताया जाता है।
2021 में यह लगातार छटा संस्करण है और इसमें ‘अनुसंधान संस्थान’ की नई श्रेणी भी जोड़ी गई है। अब यह रैंकिंग कुल मिलाकर 11 श्रेणियों में जारी की गई है।
मोटे तौर पर शिक्षण संस्थानों का विश्लेषण 5 क्षेत्रों में किया जाता है जिनमें "शिक्षण, सीखने और संसाधन," "अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास," "स्नातक परिणाम," "आउटरीच और समावेशिता," और "धारणा" शामिल हैं।
संपूर्ण संस्थानों में इस वर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास को सर्वोच्च रैंक किया गया है। आईआईटी, मद्रास ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया।
विश्वविद्यालयों में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू को और कॉलेजों में मिरांडा हाउस, दिल्ली को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ। भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू ने अनुसंधान संस्थान की नव परिचित श्रेणी में भी शीर्ष स्थान पाया।
मैनेजमेंट क्षेत्र में भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद प्रथम आया और फार्मेसी क्षेत्र में जामिया हमदर्द, नई दिल्ली।
मेडिकल श्रेणी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली और लॉ श्रेणी में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू ने पहली रैंक पाई।
इस वर्ष आर्किटेक्चर और डेंटल श्रेणियों में बदलाव देखा गया है। आर्किटेक्चर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की जो 2020 में दूसरे स्थान पर था इस वर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर को पीछे छोड़ प्रथम आया है।
ऐसे ही डेंटल श्रेणी में भी मनिपाल कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज, मनिपाल ने 2020 के दूसरे स्थान से उठाकर मौलाना आज़द इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, नई दिल्ली की जगह प्रथम स्थान पाया।
वेबकास्ट के दौरान शिक्षा मंत्री ने विदेश में शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों की बढ़ती मात्र को स्वदेश की और मोड़ने के उद्देश्य में शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता को काफी मत्वपूर्ण बताया।