बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में एनडीए के भीतर एक दिलचस्प तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू इस बार एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर बढ़ती दिख रही है और इसका बड़ा श्रेय चिराग पासवान व उनकी पार्टी एलजेपी (रामविलास) को दिया जा रहा है।

बता दे कि 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने रणनीति के तहत बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारे, बल्कि जेडीयू को निशाने पर रखा। नतीजा यह हुआ कि जेडीयू को भारी नुकसान उठाना पड़ा और वह बीजेपी से काफी पीछे रह गई। लेकिन इस बार समीकरण बिल्कुल उलट है। चुनाव से ठीक पहले छठ पूजा के दौरान नीतीश कुमार का चिराग के घर जाना, प्रसाद ग्रहण करना—राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत माना गया था। अब लगता है कि वही समीकरण सीटों में बदलता दिख रहा है।
चिराग का साथ, जेडीयू को फ़ायदाइस बार स्थिति बिल्कुल उलट है। चुनाव से पहले नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच संबंध सुधरे, यहां तक कि नीतीश कुमार ने छठ पूजा के मौके पर चिराग के घर जाकर प्रसाद भी खाया और उन्हें आशीर्वाद दिया था।
रुझानों के अनुसार, जेडीयू 70 सीटों पर आगे चल रही है और भाजपा को कड़ा मुकाबला दे रही है। एलजेपी (रामविलास) भी 15 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। चिराग पासवान का एनडीए में आना और पूरी ताकत से चुनाव लड़ना, जेडीयू के लिए निर्णायक साबित हो रहा है। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, जिससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का 2020 का 'दुख' दूर हो सकता है।
2020 में जेडीयू तीसरे नंबर पर रही थी। तब भाजपा ने 110 सीटों पर लड़कर 74 जीतीं, जेडीयू ने 115 सीटों पर लड़कर सिर्फ 43 सीटें हासिल कीं और एलजेपी(आर) 135 सीटों पर लड़ी, पर केवल 1 सीट जीत सकी, लेकिन जेडीयू को भारी नुकसान पहुंचाया।
हालांकि उस समय भाजपा ने नीतीश को ही मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन जेडीयू के भीतर यह टीस लगातार बनी रही कि वह सीटों की संख्या में पीछे रह गई। इस बार रुझानों में जेडीयू की बेहतर स्थिति नीतीश के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।।