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जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे बिहार विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है।

Rajya Sabha elections : बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। राज्यसभा की 37 सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा भरना राज्य की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे बिहार विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है। उनके साथ जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता रामनाथ ठाकुर भी राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा के जरिए केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में लगभग दो दशकों बाद एक बड़े सत्ता परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है।
करीब 20 वर्षों से बिहार की सत्ता की धुरी बने रहे नीतीश कुमार के दिल्ली की राजनीति में जाने की चर्चा ने राज्य की सियासत को नई दिशा दे दी है। सूत्रों के अनुसार यदि वे राज्यसभा सदस्य बनने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बनने की संभावना प्रबल हो सकती है। हालांकि इस मुद्दे पर जेडीयू की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार को पटना में जेडीयू के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि पार्टी के नेता फिलहाल सार्वजनिक रूप से इस विषय पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
नीतीश कुमार के नामांकन के बाद एनडीए के भीतर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार में एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में संभावित नई सरकार के गठन और सत्ता के नए समीकरणों पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि अगर सत्ता परिवर्तन होता है तो बिहार में गठबंधन की राजनीति में भाजपा की भूमिका पहले से अधिक मजबूत हो सकती है।
अगर नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में जाते हैं तो बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल राज्य सरकार में भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार अगर मुख्यमंत्री भाजपा का होता है तो जेडीयू को उपमुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नई व्यवस्था में एक उपमुख्यमंत्री होगा या दो।
नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की खबर के साथ ही मुख्यमंत्री पद को लेकर कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। सबसे प्रमुख नाम नित्यानंद राय का माना जा रहा है, जो फिलहाल केंद्र सरकार में मंत्री हैं और भाजपा के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। यादव समुदाय से आने वाले नित्यानंद राय को सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। दूसरा नाम उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का है। कुशवाहा समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी बिहार भाजपा का एक बड़ा चेहरा हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि भाजपा नेतृत्व किसी अति पिछड़े वर्ग की महिला नेता को आगे कर नया राजनीतिक संदेश देने की रणनीति अपना सकता है। हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी ने नेतृत्व चयन में चौंकाने वाले फैसले लिए हैं, इसलिए बिहार में भी ऐसा कदम उठाया जा सकता है। Rajya Sabha elections
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