बिहार की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे और राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की तय प्रक्रिया के बाद सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

Bihar News : बिहार की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे और राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की तय प्रक्रिया के बाद सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से कब इस्तीफा देंगे और एनडीए की नई सरकार किस तारीख को औपचारिक रूप लेगी। ताजा राजनीतिक संकेत बताते हैं कि बदलाव की पटकथा लगभग तैयार है, हालांकि अंतिम फैसला अब भी शीर्ष स्तर की सहमति पर निर्भर माना जा रहा है।
नीतीश कुमार के 9 अप्रैल को दिल्ली जाने और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की चर्चा ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राज्यसभा की शपथ के तुरंत बाद इस्तीफा नहीं होगा, बल्कि उसके बाद बिहार में सरकार बदलने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ सकती है। यही वजह है कि आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
कई रिपोर्टों में 14 अप्रैल 2026 की तारीख सबसे ज्यादा चर्चा में है। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेने के बाद कुछ दिन मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं और फिर 14 अप्रैल को अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं। इससे पहले 13 अप्रैल के आसपास मंत्रिमंडल की बैठक या एनडीए विधायक दल की बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आधिकारिक कार्यक्रम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए इन तारीखों को संभावित राजनीतिक समय-रेखा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जदयू की ओर से यह साफ संकेत दिया गया है कि बिहार में अगली सरकार का नेतृत्व भाजपा करेगी। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी कहा है कि भाजपा गठबंधन की बड़ी पार्टी है, इसलिए नेतृत्व उसी के पास जाएगा। हालांकि नए मुख्यमंत्री के नाम पर अब तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में कई नाम सामने हैं। इनमें सामाजिक समीकरणों के लिहाज से सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में लिया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा शपथ और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बीच कुछ दिन का अंतर रखना एक रणनीतिक फैसला हो सकता है। इससे सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को अचानक झटके की तरह नहीं, बल्कि नियंत्रित बदलाव के रूप में पेश किया जा सकेगा। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि एनडीए यह संदेश देना चाहता है कि नीतीश कुमार का प्रभाव बिहार की सत्ता और प्रशासनिक दिशा पर आगे भी बना रहेगा, भले ही वह दिल्ली की राजनीति में नई भूमिका निभाएं।
बिहार में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के दिल्ली से लौटने के बाद मौजूदा मंत्रिमंडल की एक अहम बैठक हो सकती है। इसे मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक के तौर पर भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही मौजूदा कैबिनेट स्वतः भंग हो जाएगी और उसके बाद एनडीए विधायक दल की प्रक्रिया के जरिए नए नेता का चयन होगा। इसके बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ होगा।
इस पूरे सियासी घटनाक्रम में एक बात लगातार उभरकर सामने आ रही है कि नई सरकार के गठन के बाद भी शासन की शैली में निरंतरता बनाए रखने की कोशिश होगी। राजनीतिक संकेत यही हैं कि नई व्यवस्था में भी नीतीश कुमार की नीतियों, उनके प्रशासनिक मॉडल और सामाजिक संतुलन की लाइन को पूरी तरह छोड़ा नहीं जाएगा। यानी चेहरा बदल सकता है, लेकिन सत्ता की कार्यशैली में निरंतरता का संदेश देने की तैयारी है। यह एनडीए के लिए राजनीतिक तौर पर भी जरूरी माना जा रहा है।
भले ही भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनने की बात लगभग तय मानी जा रही हो, लेकिन मुख्यमंत्री चेहरे का चयन आसान नहीं दिखता। बिहार की राजनीति में जातीय और सामाजिक संतुलन का महत्व बेहद ज्यादा है। ऐसे में भाजपा को ऐसा चेहरा चुनना होगा जो गठबंधन के भीतर स्वीकार्य हो, संगठन के लिए मजबूत हो और नीतीश कुमार के बाद बनने वाले राजनीतिक खालीपन को संभाल सके। यही कारण है कि अंतिम नाम पर अभी सावधानी के साथ मंथन चल रहा है। Bihar News