Nitish kumar: नीतीश कुमार की सत्ता यात्रा और विधानसभा चुनावों की कहानी
Nitish kumar
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 12:31 AM
Nitish kumar: बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से नीतीश कुमार एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। 2005 से 2020 तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपनी राजनीतिक कुशलता के बल पर सत्ता को बनाए रखा, भले ही सीटों और वोट प्रतिशत में उतार-चढ़ाव आते रहे। आइए, जानते हैं कि इन वर्षों में बिहार की राजनीतिक स्थिति कैसे बदली और किस तरह नीतीश कुमार सत्ता में बने रहे।
2005 - सात महीनों में दो चुनाव, बदल गया बिहार का सियासी परिदृश्य
2005 में बिहार में दो बार विधानसभा चुनाव हुए। पहली बार फरवरी में हुए चुनावों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 75 सीटों पर सिमट गई, जबकि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन को 92 सीटें मिलीं। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) 29 सीटें जीतकर किंगमेकर बनी, लेकिन सरकार बनाने में असमर्थ रही, जिससे राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।
अक्टूबर-नवंबर में हुए पुनः चुनाव में एनडीए (जदयू-भाजपा) को स्पष्ट बहुमत मिला। जदयू ने 88 और भाजपा ने 55 सीटें जीतीं, जिससे 143 सीटों के साथ एनडीए सत्ता में आया और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने।
2010 - सुशासन के नाम पर प्रचंड जीत
अपने पहले कार्यकाल में नीतीश कुमार ने महिलाओं, अतिपिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए योजनाएं लागू कर एक नए वोट बैंक का निर्माण किया। इसके परिणामस्वरूप 2010 के चुनाव में एनडीए को बड़ी सफलता मिली। जदयू ने 115 और भाजपा ने 91 सीटें जीतीं, जिससे गठबंधन को कुल 206 सीटों पर जीत मिली। राजद केवल 22 सीटों पर सिमट गया, जबकि कांग्रेस को मात्र 4 और लोजपा को 3 सीटें मिलीं।
2015 - महागठबंधन की जीत, फिर भी नीतीश मुख्यमंत्री
2013 में नीतीश कुमार ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया और 2014 लोकसभा चुनाव अकेले लड़ा, जिसमें उन्हें करारी हार मिली। इसके बाद उन्होंने राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया। 2015 के चुनाव में महागठबंधन ने 178 सीटें जीतीं, जिसमें राजद को 80, जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं। हालांकि, 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर फिर से भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया।
2020 - एनडीए की जीत, नीतीश फिर मुख्यमंत्री
2020 के चुनाव में एनडीए ने 125 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन 110 सीटों पर सिमट गया। भाजपा ने 74 सीटें जीतीं, जबकि जदयू को केवल 43 सीटें मिलीं, जो उनकी अब तक की सबसे कम संख्या थी। फिर भी, भाजपा के समर्थन से नीतीश कुमार लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बने। Nitish kumar: