इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते भी हैं, तब भी उनके सुरक्षा घेरे में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

Bihar News : बिहार की राजनीति इस वक्त बड़े बदलाव के संकेत दे रही है और सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते भी हैं, तब भी उनके सुरक्षा घेरे में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। उन्हें पहले की तरह जेड प्लस श्रेणी की कड़ी सुरक्षा मिलती रहेगी। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण के साथ वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस संभावित सियासी बदलाव को देखते हुए उनकी सुरक्षा की समीक्षा की गई, जिसके बाद ‘बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000’ के तहत यह तय हुआ कि भविष्य में भी उन्हें सर्वोच्च स्तर का सुरक्षा कवच मिलता रहेगा। यानी कुर्सी बदले या जिम्मेदारी, लेकिन नीतीश कुमार की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आएगी।
जेड प्लस सुरक्षा देश में दी जाने वाली सबसे कड़ी और उच्चस्तरीय वीवीआईपी सुरक्षा श्रेणियों में गिनी जाती है। यह सुरक्षा उन लोगों को दी जाती है जिनकी जान को गंभीर खतरा माना जाता है। इस श्रेणी में सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति के चारों ओर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाती है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही रोका जा सके। इस सुरक्षा घेरे में करीब 55 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें एनएसजी कमांडो, विशेष सुरक्षा इकाइयों के अधिकारी और स्थानीय पुलिस या अर्धसैनिक बल के जवान शामिल होते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों में बांटा जाता है, ताकि व्यक्ति की आवाजाही, सार्वजनिक कार्यक्रमों और निजी ठिकानों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जा सके।
जेड प्लस सुरक्षा में तैनात कमांडो अत्याधुनिक हथियारों और संचार उपकरणों से लैस होते हैं। सुरक्षा के पहले घेरे में आम तौर पर एनएसजी के विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो मौजूद रहते हैं, जो हर समय तत्पर रहते हैं। इसके अलावा एस्कॉर्ट वाहन, बुलेटप्रूफ गाड़ियां और जरूरत पड़ने पर जैमर वाहन भी सुरक्षा काफिले का हिस्सा बनाए जाते हैं। यह सुरक्षा सिर्फ व्यक्ति की मौजूदगी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसके यात्रा मार्ग, सभा स्थल, आवास और मुलाकातों तक हर स्तर पर नजर रखी जाती है। यही वजह है कि इसे देश की सबसे भरोसेमंद सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक माना जाता है।
जेड प्लस सुरक्षा आमतौर पर उन संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों या बेहद अहम व्यक्तियों को दी जाती है, जिनके खिलाफ सुरक्षा खतरे का स्तर बहुत अधिक आंका जाता है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, कुछ मुख्यमंत्रियों और अन्य अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों को इस तरह का सुरक्षा कवर दिया जाता है। इस सुरक्षा को देने का फैसला सामान्य तौर पर खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे के मूल्यांकन के आधार पर लिया जाता है। गृह मंत्रालय या संबंधित सक्षम प्राधिकरण इन रिपोर्टों की समीक्षा के बाद तय करता है कि किसी व्यक्ति को किस स्तर की सुरक्षा मिलनी चाहिए।
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और लंबे समय से सत्ता के केंद्र में रहे हैं। अब अगर वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा की भूमिका निभाने दिल्ली जाते हैं, तब भी उनकी राजनीतिक और सार्वजनिक सक्रियता बनी रहेगी। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।यही कारण है कि पद परिवर्तन की संभावना के बावजूद उनकी सुरक्षा में कटौती नहीं की जा रही। यह फैसला इस बात का संकेत है कि राज्य और सुरक्षा एजेंसियां उन्हें अब भी उच्च जोखिम वाले सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में देख रही हैं।
बिहार में जेड प्लस स्तर की सुरक्षा मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्राप्त है। राज्य के दूसरे बड़े नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा भी समय-समय पर समीक्षा के दायरे में रहती है। हालांकि, नीतीश कुमार को लेकर जारी ताजा व्यवस्था इसलिए अधिक चर्चा में है क्योंकि यह पद छोड़ने के बाद भी सुरक्षा जारी रखने से जुड़ी है।
जेड प्लस सुरक्षा बेहद महंगी सुरक्षा व्यवस्था मानी जाती है। एक व्यक्ति को इस स्तर का सुरक्षा कवर देने में हर महीने लाखों रुपये खर्च होते हैं। इसमें सुरक्षाकर्मियों का वेतन, आधुनिक हथियार, संचार तंत्र, वाहन, ईंधन, रखरखाव और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसी कई चीजें शामिल होती हैं। अनुमान के मुताबिक, इस श्रेणी की सुरक्षा पर हर महीने 30 लाख रुपये से अधिक खर्च आ सकता है। अगर सुरक्षा सरकार की ओर से प्रदान की जा रही है, तो इसका खर्च सरकारी स्तर पर उठाया जाता है। वहीं कुछ खास परिस्थितियों में निजी व्यक्तियों को भी ऐसी सुरक्षा दी जा सकती है, लेकिन उसके लिए अलग नियम लागू होते हैं। Bihar News