बिना नोटिस वोटर लिस्ट से नहीं हटेगा कोई नाम, SIR पर SC में EC का हलफनामा
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 07:56 PM
बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान को लेकर निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने साफ कहा है कि बिना पूर्व नोटिस, सुनवाई और सक्षम अधिकारी के तर्कसंगत आदेश के किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है जिसमें एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने आरोप लगाया था कि SIR की प्रक्रिया में 65 लाख मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से बाहर कर दिया गया और पारदर्शिता के मानकों का पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए 6 अगस्त को चुनाव आयोग को स्थिति स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। अगली सुनवाई 13 अगस्त को होनी है। Supreme Court
SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता के दावे
निर्वाचन आयोग ने बताया कि SIR का पहला चरण पूरा हो चुका है और 1 अगस्त 2025 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। इस चरण में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की पुष्टि कर रहे थे। आयोग के अनुसार, बिहार के 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ लोगों ने दस्तावेजों के साथ अपने नाम की पुष्टि की है। इस प्रक्रिया में 38 जिला निर्वाचन पदाधिकारी, 243 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, 77,895 BLO, 2.45 लाख स्वयंसेवक, 1.60 लाख बूथ स्तर एजेंट सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक दलों को समय-समय पर छूटे हुए मतदाताओं की सूची भी दी गई है।
प्रवासी, युवा, दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक
प्रवासी मजदूरों तक पहुंचने के लिए 246 अखबारों में हिंदी में विज्ञापन दिए गए। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से फॉर्म भरने की सुविधा दी गई। शहरी निकायों में विशेष कैंप लगाए गए। युवाओं के लिए अग्रिम पंजीकरण, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं की मदद के लिए 2.5 लाख स्वयंसेवकों की तैनाती की गई। आपत्तियों पर सुनवाई और अपील की प्रक्रिया प्रारूप मतदाता सूची के खिलाफ 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। सभी आपत्तियों का निस्तारण 7 कार्यदिवसों में किया जाएगा। असंतुष्ट व्यक्ति पहले ERO (निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील कर सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि प्रत्येक हटाए गए नाम के पीछे कारण बताया जाएगा और सभी कार्यवाही प्रेस रिलीज और अन्य माध्यमों से जनता को नियमित रूप से बताई जा रही है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी नाम हटाने से पहले नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई और सक्षम अधिकारी का आदेश अनिवार्य होगा। इस हलफनामे के बाद अब निगाहें 13 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि क्या निर्वाचन आयोग की दलीलें SIR में पारदर्शिता और वैधानिकता को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं। Supreme Court