बारामती हादसा: ईंधन पर उठे सवालों के बीच लोढ़ा का पलटवार

लोढ़ा ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने डायरेक्टर ऑफ सेफ्टी को पत्र लिखकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच दल को सबसे महत्वपूर्ण सबूत 'ब्लैक बॉक्स' और ट्रांसमिशन डेटा मिल चुका है।

Mangal Prabhat Lodha Ajit Pawar Plane Crash
लोढ़ा ने रोहित पवार के 'बम' सिद्धांत को कहा निराधार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Feb 2026 05:34 PM
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Mangal Prabhat Lodha Ajit Pawar Plane Crash: बारामती में हुए विमान हादसे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दिग्गज नेता अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की सियासत में हवा के झोंके तेज हो गए हैं। हादसे को लेकर सामने आ रही 'साजिश' की चर्चाओं ने राजनीतिक संघर्ष का नया दौर शुरू कर दिया है। विधायक रोहित पवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मुखर विरोध किया है, साथ ही उन्होंने इन अटकलों को बिल्कुल निराधार बताया है।

रोहित पवार का 'विस्फोटक' दावा: 'दुर्घटना नहीं, साजिश थी'

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब विधायक रोहित पवार ने बुधवार को मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने इस हादसे को महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक 'सोची-समझी साजिश' बताया। रोहित पवार ने सवाल उठाते हुए कहा कि हादसे के दिन बारामती में बहुत कम दृश्यता (Visibility) के बावजूद पायलट कैप्टन सुमित कपूर ने विमान को वापस नहीं मोड़ा। इससे भी गंभीर आरोप यह था कि विमान में जरूरत से कहीं ज्यादा, लगभग 3000-3500 लीटर ईंधन भरा गया था। उन्होंने आरोप लगाया, "विमान के अंदर ईंधन के अतिरिक्त कैन भी रखे गए थे, ताकि टकराते ही विमान एक विशाल 'बम' की तरह फट जाए और सारे सबूत मिट्टी में मिल जाएं।" इन बयानों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

लोढ़ा का जवाब: 'ब्लैक बॉक्स' में है सच्चाई, बचें राजनीति से

रोहित पवार के इन 'इंधन वाले दावो' पर मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कड़ा पलटवार किया। लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस तथ्य के सार्वजनिक रूप से शंका जताना और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने कहा, "रोहित पवार को शुरुआत में कोई शंका नहीं थी, लेकिन अब वे बिना तथ्यों के बयानबाजी कर रहे हैं। यह जांच को प्रभावित करने वाला कदम है।"

लोढ़ा ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने डायरेक्टर ऑफ सेफ्टी को पत्र लिखकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच दल को सबसे महत्वपूर्ण सबूत 'ब्लैक बॉक्स' और ट्रांसमिशन डेटा मिल चुका है, जिसका वैज्ञानिक विश्लेषण जारी है। लोढ़ा ने कहा, "जब तक आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह का कयास लगाना गैर-जिम्मेदाराना है। सरकार इस मामले की तह तक जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"

विवादों के बीच सरकार का फोकस: आपदा प्रबंधन और शिक्षा

राजनीतिक तनाव के बीच मंत्री लोढ़ा ने प्रशासनिक कार्यों पर भी फोकस बनाए रखा। उन्होंने 'अनिरुद्धबापू आपदा प्रबंधन अकादमी' और 'महाराष्ट्र स्किल डेवलपमेंट' के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को समय की महत्वपूर्ण जरूरत बताया। लोढ़ा ने कहा, "एआई (AI) के युग में भी आपदा के समय 'गोल्डन ऑवर' में जान बचाने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की कमी है। इस पहल से न केवल आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक सेवा की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा।" Mangal Prabhat Lodha Ajit Pawar Plane Crash

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मुंबई RPF ने ‘फर्जी बाबा बंगाली’ का किया पर्दाफाश

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से लगभग 15,000 मुद्रित पोस्टर बरामद किए हैं। इन पोस्टरों पर ‘बाबा बंगाली’ की ओर से वशीकरण, प्रेम बाधा दूर करने और नौकरी दिलाने जैसी झूठी दावेदारी की गई थी।

Fake Baba Racket
फर्जी बाबा रैकेट के पीछे पूरे गिरोह का खुलासा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Feb 2026 04:28 PM
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Fake Baba Racket: मुंबई की लोकल ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को अंधविश्वास के जाल में फंसाने वाले ‘फर्जी बाबा बंगाली’ रैकेट का भंडाफोड़ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने किया है। सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो रेलवे की संपत्ति पर अवैध विज्ञापन चिपकाकर लोगों को लूट रहा था।

छापेमारी और गिरफ्तारी

वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के विशेष निर्देशों पर मंगलवार, 17 फरवरी को रे रोड इलाके में दारुखाना स्थित मीरा अली दरगाह के पास छापेमारी की गई। RPF की आईटी सेल और सतर्कता टीम को इस रैकेट की जानकारी लंबे समय से थी। मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर जाल बिछाया और आरोपी मोहम्मद नजीर अंदारी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

भारी मात्रा में बरामदगी

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से लगभग 15,000 मुद्रित पोस्टर बरामद किए हैं। इन पोस्टरों पर ‘बाबा बंगाली’ की ओर से वशीकरण, प्रेम बाधा दूर करने और नौकरी दिलाने जैसी झूठी दावेदारी की गई थी। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया। उसने बताया कि वह बिना किसी आधिकारिक अनुमति के ट्रेनों के डिब्बों और स्टेशनों की दीवारों पर ये पोस्टर चिपकाता था ताकि लोगों की नजर उन पर पड़े और वे फंस जाएं।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए वडाला RPF स्टेशन में रेलवे अधिनियम की धारा 144 (अवैध फेरी), 145(बी) (न्यूसेंस), 147 (अतिक्रमण) और 166 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस को शक है कि यह काम केवल एक व्यक्ति नहीं कर रहा था, बल्कि पूरा गिरोह सक्रिय है। जांचकर्ता अब उन प्रिंटिंग प्रेसों को खोज रहे हैं जहां ये पोस्टर छपते थे और इस रैकेट के वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि इस नेटवर्क के सूत्र मुंबई के बाहर भी जुड़े हो सकते हैं। Fake Baba Racket

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रमजान में दुबई सरकार का बड़ा ऐलान, 'फैमिली इयर' का तोहफा

सरकारी कर्मचारी अब सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक ही काम करेंगे।शुक्रवार सप्ताह के अंतिम कार्य दिवस पर काम का समय और सीमित कर दिया गया है। शुक्रवार को टाइमिंग सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगी।

Year of the Family
दुबई में रमजान के नए नियम लागू (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Feb 2026 03:23 PM
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Year of the Family : पवित्र महीने रमजान की शुरुआत के साथ ही दुबई में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी सामने आई है। दुबई सरकार ने अपने कर्मचारियों के कल्याण और पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता देते हुए कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव की घोषणा की है। 'ईयर ऑफ द फैमिली' (Year of the Family) पहल के तहत लिए गए इस फैसले से लाखों सरकारी कर्मचारियों को रोजे के दौरान काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।

कम हुए काम के घंटे, बदली ऑफिस की टाइमिंग

 दुबई मानव संसाधन विभाग (Dubai Government Human Resources Department) द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, रमजान के दौरान सरकारी दफ्तरों की टाइमिंग में उल्लेखनीय कमी की गई है। नए नियमों के मुताबिक सोमवार से गुरुवार सरकारी कर्मचारी अब सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक ही काम करेंगे।शुक्रवार सप्ताह के अंतिम कार्य दिवस पर काम का समय और सीमित कर दिया गया है। शुक्रवार को टाइमिंग सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगी। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि कर्मचारी रोजे के दौरान थकान कम महसूस करें और उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने तथा धार्मिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

लचीलापन है खासियत, 7 से 10 बजे के बीच कर सकते हैं शुरुआत

सिर्फ काम के घंटे घटाना ही काफी नहीं है, सरकार ने काम करने के तरीके में भी लचीलापन लाया है। विभागों को अधिकृत किया गया है कि वे कर्मचारियों को सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच किसी भी समय ऑफिस आने की सुविधा दे सकते हैं। इसके लिए शर्त यह है कि कर्मचारी अपने निर्धारित दैनिक कार्य घंटे पूरे करें। यह व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए राहत का सबब साबित होगी जो सुबह जल्दी उठना पसंद करते हैं या ट्रैफिक की समस्या से बचना चाहते हैं।

हफ्ते में दो दिन की वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

आधुनिक कार्य संस्कृति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योग्य (Eligible) कर्मचारियों को हफ्ते में अधिकतम दो दिन घर से काम (Work From Home) करने की अनुमति दे दी है। यह सुविधा कर्मचारी के पद और काम की प्रकृति पर निर्भर करेगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल आने-जाने में होने वाली थकान कम होगी, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा और पारिवारिक स्थिरता मजबूत होगी।

शिफ्ट वाले कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, सेवा केंद्रों या आपातकालीन सेवाओं जैसे विभागों में काम करने वाले शिफ्ट कर्मचारियों के लिए अलग से टाइम-टेबल तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं में किसी तरह की रुकावट नहीं आने देना है। विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी जरूरत के हिसाब से समय सारणी तय करें।

संघीय सरकार भी बराबरी में

दुबई के इस कदम के साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की संघीय सरकार ने भी इसी तरह के लचीले नियमों की घोषणा की है। संघीय संस्थाएं शुक्रवार को अपनी 70 प्रतिशत तक कार्यशक्ति (Workforce) को रिमोट वर्क की अनुमति दे सकती हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि देश भर में कर्मचारी कल्याण को तरजीह दी जा रही है।

काम और आस्था का संगम

यह निर्णय खाड़ी देशों की उस परंपरा को दर्शाता है जहाँ रमजान के दौरान काम के घंटे कम किए जाते हैं, लेकिन इस बार इसे 'फैमिली इयर' से जोड़कर एक सामाजिक संदेश भी दिया गया है। सरकार का कहना है कि काम के घंटे कम होने के बावजूद उत्पादकता और संस्थागत प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। सही योजना और तकनीक के इस्तेमाल से कर्मचारियों को राहत देना संभव है। Year of the Family 

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