
प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के आदेश पर शासन ने इस अधिकारी को निलंबित कर दिया है।
पूरा प्रकरण इस प्रकार है। नोएडा प्राधिकरण ने गेझा तिलपता गांव के काश्तकारों की 32632.187 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया था। प्राधिकरण ने बाकायदा मुआवजे की राशि भी काश्तकारों को दे दिया था। लेकिन यह राशि कम होने के कारण वर्ष 1982 में गेझा तिलपता गांव के कुंदन ने जिला अदालत में वाद दायर किया था। वर्ष-1993 में अदालत ने मामले का निस्तारण भी कर दिया था। इस मामले में बाद में कुंदन की इकलौती बेटी रामवती ने मुआवजे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने मामला खारिज कर दिया था।
रामवती ने मामला हाईकोर्ट में लंबित बताकर नोएडा प्राधिकरण के समक्ष समझौते के लिए आवेदन किया। इस मामले को तत्कालीन सहायक विधि अधिकारी वीरेन्द्र सिंह नागर के पास भेजा गया। उन्होंने इस मामले को विधि सलाहकार दिनेश कुमार सिंह के पास मामला अग्रसारित कर दिया। इन लोगों ने फर्जीवाड़ा करते हुए प्राधिकरण को 12 करोड़ रूपए का चूना लगा दिया।
विधि अधिकारी सुशील भाटी ने सेक्टर-20 थाने में विधि सलाहकार दिनेश कुमार सिंह, सहायक विधि अधिकारी वीरेन्द्र सिंह नागर तथा रामवती के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सके बाद शासन ने जांच के बाद वीरेद्र सिंह नागर को निलंबित कर दिया।