Noida Exclusive : घटियापन की 'हद' पार कर दी नोएडा पुलिस ने
UP News: Police Inspector suspended in case of indecency with BJP leader in Shahjahanpur
भारत
चेतना मंच
22 Sep 2022 05:38 PM
Noida Exclusive : नोएडा। एक बार फिर नोएडा पुलिस (Noida police ) ने घटियापन की सारी हदें पार कर दी हैं। असली अपराधी को पकडऩे का दबाव पडऩे पर एक निर्दोष अधिकारी को आठ घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में रखा। वह तो गनीमत रही कि उस अधिकारी का विभाग व सहयोगी उसके समर्थन में आ गए अन्यथा पुलिस ने तो निर्दोष अफसर को जेल भेजने की पूरी तैयारी कर ली थी।
बता दें कि 20 सितंबर को सेक्टर-21 स्थित जलवायु विहार सोसायटी में दीवार गिरने से चार मजदूरों की मौत हो गयी थी। इस मामले में साफ तौर से गिरने वाली दीवार के पास नाले की सफाई करा रहा ठेकेदार जिम्मेदार है। पुलिस ने भी ठेकेदार सुंदर यादव को ही इस मामले का मुख्य आरोपी माना है। घटना के समय मौके पर मौजूद श्रमिक यहां तक कि इस दर्दनाक हादसे में जख्मी मजदूर भी साफ-साफ बता रहे हैं कि मजदूरों ने ठेकेदार को बता दिया था कि दीवार गिर जाएगी। फिर भी मासूम मजदूरों को जबरन नाले में उतारा गया। पता चला है कि ठेकेदार सुंदर यादव को किसी बड़े राजनेता का संरक्षण प्राप्त है। उसी संरक्षण के कारण पुलिस उसको गिरफ्तार करना तो दूर, छू तक नहीं पा रही है।
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ठेकेदार को गिरफ्तार करने में पूरी तरह नाकाम व लाचार नोएडा पुलिस ने जनता व शासन के सामने अपनी 'नाक' बचाने के लिए एक चाल चली। कल 21 सितंबर को दोपहर को लगभग सवा बारह बजे सेक्टर-21 का काम-काज देख रहे नोएडा प्राधिकरण के प्रोजेक्ट इंजीनियर (डीजीएम) श्रीपाल भाटी को सेक्टर-20 थाने में बुलाकर हिरासत में ले लिया। आरोप है कि पुलिस के अफसर व प्राधिकरण के इंजीनियर को दीवार गिरने का दोषी मानकर जेल भेजने की फिराक में थे। तभी यह बात पूरे नोएडा प्राधिकरण में फैल गई। शाम को लगभग 8 बजे बड़ी संख्या में प्राधिकरण के इंजीनियर, दूसरे अधिकारी व अनेक कर्मचारी सेक्टर-20 थाने पर पहुंच गए। थाने के बाहर भीड़ बढ़ती हुई देखकर पुलिस अफसरों के हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में डीजीएम श्रीपाल भाटी को रिहा कर दिया गया।
पुलिस के अफसर आशुतोष द्विवेदी ने सफाई दी कि प्राधिकरण के अफसर को कुछ जरूरी दस्तावेजों को तस्दीक करने के लिए थाने बुलाया गया था।
पुलिस की इस कार्यवाही पर चौतरफा सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह तो पुलिस व्यवस्था में गिरावट की चरमसीमा है। नोएडा की पुलिस घटियापन पर उतर आई है। सवाल पूछा जा रहा है कि मुख्य आरोपी को पकडऩे में लाचार होने पर किसी जिम्मेदार अधिकारी को जेल भेज देने की साजिश रचने से घटिया हरकत पुलिस क्या कर सकती है? सवाल यह भी है कि जिस अवैध हिरासत को पुलिस के अधिकारी दस्तावेजों का सत्यापन बता रहे हैं वह सत्यापन प्राधिकरण के कार्यालय में जाकर क्यों नहीं किया और कराया गया। नोएडा प्राधिकरण का प्रोजेक्ट इंजीनियर तो थाने के कोतवाल से बहुत बड़ा अधिकारी होता है फिर उस अधिकारी को जबरन थाने में बैठाकर रखने की बजाय उसके कार्यालय में जाकर पूछताछ क्यों नहीं की गयी? यदि इस मामले में प्राधिकरण के इंजीनियर का कसूर है तो उसे थाने पर भीड़ जमा होते ही थाने से रिहा क्यों कर दिया गया? ऐसे ही अनगिनत सवाल नोएडा की पुलिस व्यवस्था से आम जनता पूछ रही है।
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समाजसेवकों ने की मुख्यमंत्री से शिकायत
नोएडा पुलिस के घटियापन का यह अकेला मामला नहीं है। हाल ही में चर्चित रहे श्रीकांत त्यागी प्रकरण की बात हो या चौड़ा रघुनाथपुर गांव में गरीब ब्राह्मïण परिवार के उत्पीडऩ का मामला हो और अब 4 मजदूरों की मौत का मामला। प्रत्येक संवदेनशील मामले में नोएडा पुलिस का गैर जिम्मेदाराना चेहरा सामने आया है। इस संबंध में नोएडा के डेढ़ दर्जन से भी अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में नोएडा की पुलिस की व्यवस्था को सुधारने की मांग की गयी है।