Noida News : डीएलसी ने शासन के आदेश को दिखाया ठेंगा
भारत
RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 04:36 PM
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RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 04:36 PM
16 जून को तत्काल मुख्यालय कार्यभार ग्रहण करने के थे आदेश
Noida : नोएडा। कभी-कभी कमाऊ वाली कुर्सी के मोह में अधिकारी इतने धृतराष्ट्र हो जाते हैं कि वे शासन के आदेश को भी ठेंगे पर रखने से नहीं डरते हैं। ऐसा ही मामला नोएडा में तैनात उपश्रमायुक्त (डीएलसी) का प्रकाश में आया है। सर्वविदित है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों के मद्देनजर शासन ने 16 जून को एक कार्यालय आदेश जारी करके उपश्रमायुक्त वंदना को तत्काल प्रभाव से कानपुर स्थित श्रमायुक्त मुख्यालय में संबद्घ करने के निर्देश दिए थे। यह कार्यालय आदेश उपसचिव सत्यवान सिंह द्वारा जारी किए गए थे। उसमें कहा गया था कि वंदना तत्काल प्रभाव से कानपुर में जाकर कार्यभार ग्रहण करें। इसके बाद भी उप श्रमायुक्त ने 20 जून को 20-25 लाख रुपए के कंपनियों के खिलाफ जारी की गई आरसी को वापस लेने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखे।
सभी पत्र उप श्रमायुक्त वंदना द्वारा नोएडा स्थित उप श्रमायुक्त कार्यालय से 21 तथा 22 जून को डिस्पैच किए गए हैं।
उप श्रम आयुक्त ने जिला कलेक्टर को 20 जून को सुपरशील फ्लैक्सिबल होज लिमिटेड के खिलाफ जारी 187491 रूपये की आरसी रोककर उप श्रमायुक्त कार्यालय को वापस करने का पत्र लिखा। इसी तरह इसी कंपनी पर जारी 1302666 रूपये की आरसी रोक कर कार्यालय को वापस करने का पत्र लिखा। इसके अलावा उप श्रमायुक्त ने 20 जून को इसी तरह करीब एक दर्जन कंपनियों के खिलाफ जारी आरसी रोकने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखे।
सवाल यह है कि शासन ने 16 जून को तत्काल प्रभाव से उप श्रमायुक्त को कानपुर श्रम आयुक्त कार्यालय जाकर कार्यभार ग्रहण करने के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद भी उन्होंने आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई। 16 जून के बाद उप श्रमायुक्त को किसी भी विभागीय कामकाज करने का कोई अधिकार नहीं था। लेकिन उन्होंने इन आदेशों की अनदेखी कर ऐसा किया।कुछ मजदूर संगठनों का आरोप है कि उप श्रमायुक्त ने यह कार्य या तो किसी बड़े राजनीतिक दबाव के तहत किया है या कंपनी प्रबंधन से पैसे लेकर किया है। शासन इस मसले पर क्या कार्यवाही करेगा यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन फिलहाल उपश्रमायुक्त की यह करतूत विभाग में चर्चा का विषय बनी हुर्ई है।