Noida News : फार्म हाउस संचालकों ने प्राधिकरण और सिंचाई विभाग को गुमराह किया!
भारत
RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 10:39 PM
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RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 10:39 PM
Noida : नोएडा। सिंचाई विभाग की अरबों रूपए की जमीन पर अवैध रूप से काबिज फार्महाउस संचालकों को किसी भी तरह की रियायत नहीं मिलेगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद फार्म हाउस संचालकों ने नोएडा प्राधिकरण में जो आपत्तियां जमा करायी हैं उसमें कई तथ्य छिपाकर शासन, सिंचाई विभाग तथा प्राधिकरण में गुमराह किया गया है। शीघ्र ही प्राधिकरण इन आपत्तियों का जवाब देगा।
बता दें कि इस वर्ष मई-जून में प्राधिकरण ने तीन क्लबों सहित 124 फार्महाउसों को ध्वस्त कर दिया गया था। प्राधिकरण ने इस क्षेत्र में 1000 फार्महाउस को अवैध घोषित किया है जिनको ध्वस्त किया जाएगा। हाल ही में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रितु माहेश्वरी ने भी स्पष्ट कर दिया था कि कार्यवाही जारी रहेगी। प्राधिकरण जो ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। उसमे सार्वजनिक नोटिस की लाइन, एनजीटी के नियमों का उल्लंघन और सिचाईं विभाग की गाइड लाइन के अनुसार है।
इलाहबाद उच्च न्यायलय के आदेश के बाद अब तक फार्म हाउस संचालाकों की ओर से 300 आपत्तियां प्राप्त की गई हैं। प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि हमें से आपत्तियां ई-मेल, स्पीड पोस्ट और अन्य माध्यमों से मिली है। अधिकांश आपत्तियां 100 से अधिक पेज की है जबकि कई में 300 से ज्यादा पेज है। उनमें से कई ने संपत्तियों के टाइटल डीड संलग्न नहीं किए हैं, जिससे ऐसे फार्महाउस के असली मालिक का विवरण जानना मुश्किल हो गया है। अधिकारी ने कहा कि हम इन आपत्तियों को कंपाइल कर रहे है। क्योंकि इनमे एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के विभिन्न आदेशों के बारे में बात की जा रही है। ऐसे कई तर्क हैं जो व्यक्तिगत संपत्ति से संबंधित हैं। उन्हें सावधानीपूर्वक पढने की आवश्यकता है ताकि उचित उत्तर दिया जा सके।
सेक्टर 135 में 53 फार्महाउस मालिकों के एक समूह, हरित किसान कल्याण समिति ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद एचसी ने 14 जून को फार्महाउस मालिकों को अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए 10 दिन और प्राधिकरण को जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया था। अदालत ने आगे प्राधिकरण से इस अवधि के दौरान यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा था।
प्राधिकरण ने यमुना के अधिसूचित क्षेत्र और बाढ़ के मैदानों में निर्माण के खिलाफ जून में सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। जिसमे लिखा था कि यूपी औद्योगिक विकास अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति के निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। यदि किसी के द्वारा कोई निर्माण किया गया है तो उसे अविलम्ब हटा दें, अन्यथा यदि नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में अनाधिकृत निर्माण पाया जाता है तो उसे ध्वस्त कर दिया जायेगा। विध्वंस प्रक्रिया पर होने वाले व्यय की वसूली भी अनाधिकृत निर्माणकर्ता जैसे भू-राजस्व के बकाया से की जायेगी। इसके अलावा इसमें शामिल अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।