
सेक्टर का रख रखाव
सेक्टर-15 के महासचिव ऋषि शर्मा के अनुसार सेक्टर-15 सेक्टर-12 से भी पहले बसा था। इसकी अलॉटमेंट 1980 में हुई थी। यह सेक्टर लगभग 40,000 वर्ग मीटर एरिया में फैला है। यहां पूरे 1150 घर हैं। सैक्टर में ए, बी, सी, डी, ई, 5 ब्लॉक हैं । यहां की जनसंख्या लगभग 30,000 है। यहां ई डब्ल्यू एस, एलआईजी, एम आई जी। हर प्रकार के फ्लैट तथा पूरे 650 प्लॉट हैं। ऋषि शर्मा के अनुसार हॉर्टिकल्चर विभाग से मद्न पाल ने पार्कों में रंग करवा दिये तथा बेंच लगा दिये हैं। लेकिन सेक्टर में इंटरलॉक टाइल्स लगाने का काम जो शुरू हुआ था वह बीच में ही रोक दिया गया और अब तक शुरू नहीं हुआ है। पॉवर कट यहाँ हर रोज ही होते हैं। जब देखो बिजली विभाग के लोग किसी न किसी की बिजली ही काटने आते रहते हैं। पूछो तो बिल नहीं दिया। बिल देने के बाद फिर लाइन जोडऩे आने में समय लगाते हैं। महासचिव ऋषि के अनुसार आरडब्लूए की ओर से 18 से 20 गार्ड सैक्टर को सुरक्शित रखने के लिए लगाए गये हैं। लेकिन सेक्टर की जनसंख्या को देखते हुए पुलिस पेट्रोलिंग नाम मात्र को भी नहीं है । सेक्टर की सुरक्षा के लिए पुलिस पेट्रोलिंग की बहुत ही आवश्यकता है। आरडब्लूए ने डी.सी.पी. के साथ हुई मीटिंग में यह बात भी रखी थी कि जो भी पेट्रोलिंग को सैक्टर में आयें। आरडब्लूए को इन्फॉर्म जरूर करें। पर अभी तक यह शुरू नहीं हुआ है। सबसे पहले बसा सेक्टर, फिर भी समस्या ही समस्या प्रसिद्घ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती गिरिजा सिंह जो इस सेक्टर में तीस 35 सालों से रह रही है। वे दो बार आरडब्लूए की अध्यक्ष भी रहीं हैं तथा फोनरवा की फाउंडर मेम्बर हैं। उनके अनुसार यह एक बहुत ही अच्छा हरा-भरा ग्रीन सेक्टर था। लेकिन दिल्ली के पास होने के कारण यहाँ आबादी बढ़ती ही जा रही है। लोग संसाधनों का सही से इस्तेमाल नहीं करते। उस हिसाब से नहीं रहते जिससे उनको हरियाली, धूप तथा ताजी हवा मिले। गिरिजा जी का मानना है कि जहां भी गांव होता है। वहां पेड़ पौधे हरियाली जरूर होती है। पर हमारे सेक्टर 15 के साथ लगता जो गांव है वहां पर पूरे प्लॉट कवर्ड । ऊंचे - ऊंचे कई मंजिल मकान। लोगों का मकान को बनाने या कवर करने में ही ज्यादा ध्यान है। सबमर्सिबल पम्प तथा पानी का दोहन उनका शौक। यही हाल अधिकतर सेक्टर के लोगों का भी है। सारा एरिया कवर्ड ऑक्सीजन न मिलने से जो जीवन घट रहा है ऐसी जागृति अधिकांश लोगों में है ही नहीं। पार्किंग की तो यहाँ बहुत ही समस्या है।
डॉक्टर आर एन पी सिंह (ई ब्लॉक) का कहना है कि बागों या जंगल में पेड़ चौड़ाई लंबाई में बढ़ते हैं। यहाँ बहुमंजिला घरों की बहुमंजिला ऊंचाई के कारण पेड़ों तक धूप नहीं पहुँच पाती है। इसलिए पेड़ ऊंचे और ऊंचे ही होते जा रहे हैं। तेज आंधी आने पर जब वे झूमते हैं। तो काफी डरावना सा लगता है।
उमेश शर्मा, का मानना है कि सेक्टर-15 तो अब पुरानी दिल्ली जैसा बन रहा है। जमीन तो बढ़ेगी नहीं लोग दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। सेक्टर-15 की तीन चीजें हैं जो खास मशहूर हैं मकान मालिक, किराएदार और पूरे सेक्टर में छाया तारों का जाल। दूर-दूर से लड़के लड़कियां पढऩे, नौकरी करने या नोएडा में अपना भविष्य खोजने आते हैं। उन्हें सेक्टर-15 सबसे अच्छा सेक्टर लगता है। क्योंकि पढ़ाई के लिए ग्रेटर नोएडा या दिल्ली जाने के लिए समय की बचत के साथ -साथ सस्ता है। कुछ सुंदरता भी बाकी है। फिर खुले पार्क भी मिल जाते हैं युवाओं को।
छात्रा अंशु का कहना है की यहाँ का सामुदायिक भवन भी अपने आप में ही एक समस्या है। आज तक टीन की छत है। अध्यक्ष धीरज कुमार का कहना है कि हमारे सेक्टर का फैलाव अब बहुत हो गया है। जिसके सामने समुदायिक केंद्र काफी छोटा पडऩे लगा है। श्रीमती गिरिजा सिंह का भी यही मानना है कि सेक्टर-15 का बारात घर अब उनके सेक्टर के लिए बहुत ही छोटा पड़ रहा है। इसलिए अलका सिनेमा के सामने जो एक बहुत बड़ा टैक्सी स्टैंड है। प्राधिकरण से निवेदन है कि वह जगह सेक्टर-15 को सामुदायिक भवन के लिए दे दी जाए। वैसे भी यहां सेक्टरी-15 के निवासी तो कम। पर दूरदराज सेक्टरों से झुग्गियों के लोग अपने शादी ब्याह फंक्शन करने अधिक आते हैं। उनमें से कई तो जाते समय पूरी गंदगी भी वहीं छोड़ जाते हैं। इसी सेक्टर के निवासी वरिष्ठï पत्रकार श्री विरेंद्र मालिक कहते हैं यहाँ कुत्ते बहुत हैं। आर.डी. शर्मा का मानना है कि दिल्ली के नजदीक होने के कारण उन्होंने यहां पर अपना घर बनाया था। यहां समस्याएं अपनी जगह हैं। लेकिन लोग बहुत मिलनसार हैं। इसलिए उनका तो यहाँ बहुत दिल लगता है।
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Noida News: Mirror roaming in the city[/caption]
विजेंद्र भाटी का मानना है की सैक्टर में ज्यादा पीजी खुल जाने से सैक्टर की व्यवस्था लचर होती जा रही है। पता सबको सब है पर आँखें बंद हैं। दिन छुपते ही सैक्टर के लोग अंदर तथा पीजी के लड़के लड़कियां बाहर। कहीं-कहीं तो घरों में अधिक लोग रहने से लोग कपड़े तक धोकर पार्कों में सुखाते हैं। परेशानी तब आती है। जब गाँव के लोग अपनी गाडियाँ सैक्टर के अंदर बिना पूछे किसी के भी घर के आगे खड़ी कर जाते हैं। फिर कई कई दिन उठाते भी नहीं। सैक्टर की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वाल है। पर वह ज्यादा ऊंची नही है। दूसरा बाउंड्री वाल में जो गेट हैं वो सदा खुले रहते हैं। जिससे असमाजिक तत्व सैक्टर में कभी भी घुस आते हैं। सुरक्षा के लिए अधिक गार्ड चाहिए। लेकिन आरडब्लूए भी क्या करे?
सेक्टर की सुरक्षा
अनिल पांडे के अनुसार सैक्टर की सुरक्षा अधिक होनी चाहिए शाम को। रेहडिय़ों वाले गेट नंबर 2 पर आकर इस पूरे इलाके को घेर फूड कोर्ट में बदल देते हैं। अकेले रहने वाले किराये दार इनके खाने वाले ग्राहक हैं । यूं ये सारा गेट ही घेर लेते हैं। जिनके बीच में झपट मार भी कभी कभी शामिल जो जाते हैं। बी ब्लॉक से हरीश कहते हैं की अंदर की सड़कों पर लोग बहुत ही तेज गाडियाँ भगाते हैं। उनके पीछे फिर कुत्ते भोंकते हुए भागते हैं। और ऐसा दिन में कितनी ही बार और किसी भी समय हो जाता है। इस सैक्टर की गंभीर समस्या अब ये है की सडकों की बार-बार रिसर्फेसिंग से सड़के ऊंची तथा मकान नीचे होने लगे हैं। घरों के आगे बरसाती पानी की निकासी को बनी नालियाँ तो अधिकांशत: घरों के आगे बने रेम्पों के नीचे ही बंद हैं। बारिश आते ही पानी बहुत इक_ा हो जाता है। वो समय अब दूर नहीं की बारिश आने पर सेक्टर के घरों में बाथरूम से बैक फलो ही शुरू हो जाये।
आरडब्लूए का परिचय
इस सैक्टर में कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। आरडब्लूए पदाधिकारियों के नाम इस प्रकार हैं- अध्यक्ष धीरज कुमार, महासचिव ऋषि शर्मा, सह अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर, कोषाध्यक्ष सुबोध जैन।