Noida News : नोएडा सिटी सेंटर मामले में वेब समूह को अब अपीलेट ट्रिब्यूनल से भी करारा झटका लगा है। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने एनसीएलटी के फैसले को जायज करार दिया है। इतना ही नहीं वेव ग्रुप की कंपनी के खिलाफ नोएडा अथॉरिटी की ओर से की गई कार्यवाही को भी सही माना है। नोएडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु महेश्वरी ने यह जानकारी दी है।
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नोएडा अथॉरिटी ने मार्च 2011 में वेव समूह को शहर के सेक्टर-25 और सेक्टर-32 में 6,14,000 वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया था। इस जमीन पर वेब समूह की कंपनियों ने आवासीय और वाणिज्यिक योजनाएं लांच कीं। इसे ही वेव सिटी सेंटर का नाम दिया गया। वर्ष 2016 में बिल्डर ने प्राधिकरण को आवेदन देकर जमीन लौटाने की बात कही। हालांकि, जमीन वापस लौटाने की अर्जी पर कोई फैसला नहीं हो पाया। इसके बाद बिल्डर ने प्रोजेक्ट सेटेलमेंट पॉलिसी के तहत एक आवेदन किया। जिसमें 4.50 लाख वर्ग मीटर जमीन वापस लेने की बात कही। इस दौरान बिल्डर ने प्राधिकरण को जमीन के बदले पैसा चुकाना बंद कर दिया।
दूसरी तरफ नोएडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु महेश्वरी ने कड़ा रुख अख्तियार किया। वेव समूह की कंपनी को डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया। प्राधिकरण की ओर से अपना बकाया पैसा वसूल करने के लिए लगातार डिमांड नोट भेजे गए। जिन पर कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। पैसा भी जमा नहीं किया गया। सीईओ ने मार्च 2021 में नोएडा सिटी सेंटर की जमीन का आवंटन रद्द कर दिया। प्राधिकरण ने 11 मार्च 2021 को जमीन पर कब्जा वापस ले लिया। प्राधिकरण ने घोषणा की कि इस जमीन को 9 टुकड़ों में विभाजित करके दूसरी कंपनियों को आवंटित किया जाएगा। जिससे शहर को करीब 7,000 करोड रुपए की आमदनी होगी।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने वेव समूह की यह याचिका को 6 जून 2022 को खारिज कर दी। एनसीएलटी ने कंपनी को कड़ी फटकार लगाई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कंपनी धोखाधड़ी और षड्यंत्र के तहत दिवालियापन की प्रक्रिया में शामिल होना चाहती है। कंपनी प्रबंधन जानबूझकर ऐसा कर रहा है।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल से करारी हार के बाद वेव समूह ने अपीलेट ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। अब अपीलेट ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य की डबल बेंच ने गुरुवार को फैसला सुनाया है। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने भी वेव समूह की याचिका खारिज कर दी है।