Noida News : शिक्षा माफिया (Education Mafia) को मेरठ पुलिस का खुला आर्शीवाद, एफआईआर (FIR) के 20 दिन बाद भी कार्यवाही नहीं
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:55 AM
Noida: नोएडा/मेरठ। शिक्षा के काले कारोबार पर लगाम लगाने में पुलिस और प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। शिक्षा विभाग (Education Department) की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के बावजूद पुलिस फर्जी एनओसी (Fake NOC) पर स्कूल चलाने वाले शिक्षा माफिया (Education Mafia) को गिरफ्तार करना तो दूर, उसके पास तक नहीं पहुंच पा रही है। गौतमबुद्ध नगर में ही ऐसे दो स्कूलों का मामला सामने आया है, जो फर्जी एनओसी (Fake NOC) पर संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों के संचालकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने 20 जून को एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी, लेकिन मेरठ पुलिस इन शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। उन्हें गिरफ्तार करना तो दूर उनको अभी तक छू भी नहीं पाई है मेरठ पुलिस। आरोप है कि अब गौतमबुद्ध नगर के दादरी के आमका रोड स्थित सनराइज एकेडमी (Sunrise Academy) के तथाकथित प्रबंधक सुभाष सिंह (Subhas Singh ) और गौतमबुद्ध नगर के ही वैदपुरा स्थित इंस्पायर इंटरनेशनल स्कूल ( Inspire International School) के डायरेक्टर गोपाल नागर (Gopal Nagar) फर्जी एनओसी पर स्कूल का संचालन कर रहे हैं, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस इन माफियाओं को आर्शीवाद दिए हुए है।
मेरठ के संयुक्त शिक्षा निदेशक (Joint Director of Education )ओंकार शुक्ला ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर के दादरी के आमका रोड स्थित सनराइज एकेडमी के तथाकथित प्रबंधक सुभाष सिंह और गौतमबुद्ध नगर के ही वैदपुरा स्थित इंस्पायर इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर गोपाल नागर फर्जी एनओसी (NOC) पर स्कूल का संचालन कर रहे हैं। उनके खिलाफ मेरठ के लालकुर्ती थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि इन लोगों ने फर्जी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) तैयार कर विद्यालय को सीबीएसई (CBSE) नई दिल्ली से सम्बद्धता प्राप्त कर ली। उन्होंने बताया कि शासनादेश के मुताबिक सीबीएसई (CBSE) और आईसीएसई (ICSE) की सम्बद्धता के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गत करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए मण्डल स्तर पर समिति का गठन किया गया है। इस समिति में मण्डलायुक्त अध्यक्ष, जिलाधिकारी, मण्डलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक और सम्बन्धित जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक को शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि शासनादेश के प्राविधान के अनुसार विद्यालय संचालन के लिए सीबीएसई और आईसीएसई से सम्बद्धता प्राप्त करने के लिये मण्डलीय समिति द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये विद्यालय के प्रबन्धक को अभिलेखों के साथ मण्डलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के कार्यालय को आवेदन देना होता है। उन्होंने बताया कि सुभाष सिंह और गोपाल नागर ने अपने विद्यालयों की सम्बद्धता के लिए आवेदन किया था। समिति ने उनके आवेदनों पर कुछ आपत्तियां की थीं। बाद में जाँच में पता चला की स्कूल प्रबंधकों ने आपत्तियों का निराकरण नहीं किया और स्वंय फर्जी एवं कूटरचित्र तरीके से अनापत्ति प्रमाण पत्र तैयार कर जमा करा दिया।
मेरठ पुलिस शक के घेरे में
इन दोनों शिक्षा माफियाओं के विरूद्ध एफआईआर दर्ज हुए 20दिन हो गए हैं। मेरठ पुलिस इन्हें गिरफ्तार करने के बजाए अदालत जाने का वक्त दे रही है। थाने से लेकर ऊपर तक केवल जांच-जांच का खेल खेला जा रहा है।
चेतना मंच को पता चला है कि दोनों माफियाओं में अग्रिम जमानत कराने के लिए मेरठ के जिला जज रजत कुमार जैन की अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल की है। 11 जुलाई को जमानत पर सुनवाई होनी है। कानूनविदों का मत है कि इस प्रकार के मामलों में जिला स्तर से जमानत नामुंकिन है। अपराधियों पर पुलिस की (कृपा ) ऐसे ही बनी रही तो मामला हाईकोर्ट जाएगा और वहां से ये माफिया अग्रिम जमानत लेकर धड़ल्ले से शिक्षा की दुकान चलाएंगे।