
ज्ञात रहे कि जनपद गौतमबुद्धनगर तीन दशक से माफियाओं की गिरफ्त में रहा है। यमुना और हिंडन के बीच बसा यह जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गैंगों की पहली पसंद रहा है। महेन्द्र फौजी, सतबीर, गुर्जर, नरेश भाटी यहां की सरजमी पर अपना दबदबा कायम रखने के लिए अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करते थे। एक दौर ऐसा भी रहा जब सुंदर भाटी नामक बाहुबली का यहां एकछत्र राज रहा। कंपनियों से उगाही, ट्रांसपोर्ट के कारोबार से लेकर ठेकेदारी के अलावा स्क्रैप की खरीद-फरोख्त में वर्चस्व को लेकर समय-समय पर यहां वारदातों को अंजाम दिया जाता रहा है। शायद यही वजह रही होगी कि प्रदेश में जो भी सरकार रही उसकी छवि को बनाने और बिगाडऩे के लिए इसी इलाके को चुना जाता रहा है। इसकी एक बड़ी वजह इस इलाके का देश की राजधानी दिल्ली से सटा होना भी रहा है। सूत्र बताते हैं कि यहां आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के बाद ये गैंग पनाह के लिए हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड को अपनी शरण स्थली के तौर पर उपयोग करता रहा है।