Noida News : कंक्रीट के जंगल में संवेदनाएं भी पत्थर की
Residents of Sec 100 Blue Bird Society Noida
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 12:05 PM
अपनी, अपने परिवार व बच्चों की सुरक्षा को ही लेकर चिंतित दिखे सोसायटीवासी
Noida News : नोएडा। सेक्टर 100 की ब्लू बर्ड सोसाइटी में स्ट्रीट डॉग्स के हमले में मासूम बच्चे की मौत के बाद मंगलवार को सोसायटीवासियों ने जमकर हाई वोल्टेज ड्रामा किया। यह हंगामा होना लाजमी भी था लेकिन इस हंगामे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कंक्रीट के इस शहर में लोगों के दिल और संवेदनाएं भी पत्थर की हो गयी हैं। लोगों को अपने स्वार्थ के सामने दूसरे का दु:ख-दर्द बिल्कुल नहीं दिखता है। कुछ ऐसा ही नजारा हंगामे के दौरान देखने को मिला।
Noida News :
बता दें कि सोमवार को ब्लू बर्ड सोसाइटी में काम कर रहे मजदूर के (8 माह) के मासूम बच्चे पर स्ट्रीट डॉग्स ने हमला बोल दिया। स्ट्रीट डॉग्स के हमले में मासूम बच्चा बुरी तरह घायल हो गया। स्ट्रीट डॉग्स ने बच्चे को बुरी तरह काटा जिस कारण उसकी आंतें तक बाहर आ गई थीं। आस-पड़ोस के लोगों ने किसी तरह से उसे खूंखार कुत्तों के चंगुल से बचाया। गंभीर स्थिति में बच्चे को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वह रविवार की देर रात जिंदगी की जंग हार बैठा। मंगलवार सुबह जैसे ही सोसायटीवासियों को मासूम की मौत की खबर मिली तो वह कैंपस में इकठे हो गए। कैंपस में मौजूद हर कोई स्ट्रीट डॉग्स के आगामी हमलों व अपने बच्चों तथा खुद की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखाई दिया। कुछ लोगों ने इस दौरान स्ट्रीट डॉग लवर्स के खिलाफ भी जमकर अपनी भड़ास निकाली।
सोसायटीवासियों की भीड़ का नेतृत्व कर रहे कुछ लोगों ने अपनी आवाज उठाने के लिए रोड जाम करने की सलाह को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद सोसाइटी वाले मुख्य मार्ग पर आकर सड़क पर बैठ गए और रोड को जाम कर दिया। जाम लगने की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस व प्राधिकरण अधिकारियों ने किसी तरह लोगों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। करीब 4 घंटे तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के दौरान लोगों की संवेदनाएं स्ट्रीट डॉग्स का शिकार बने मासूम बच्चे व उसके परिजनों के प्रति कतई नहीं दिखाई दी। हंगामे में शामिल हर सोसाइटी वाले केवल और केवल अपनी, अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखाई दिए। सोसायटी वासियों की मांग थी कि परिसर से स्ट्रीट डॉग्स को पूरी तरह से हटाया जाए जिससे उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस दौरान कुछ तथाकथित नेताओं ने भी अपनी नेतागिरी चमकाने का यह अवसर हाथ से नहीं जाने दिया। सोसायटीवासियों की भीड़ की आड़ में इन नेताओं ने पुलिस और प्राधिकरण अधिकारियों पर दवाब बनाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इस पूरे हंगामे के दौरान हद तो तब हुई जब मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत को मुद्दा बनाकर प्रदर्शन कर रहे सोसाइटीवासियों ने एक बार भी उस मासूम बच्चे की मौत का दर्द झेलने वाले परिजनों की सुध लेना तक उचित नहीं समझा। किसी भी सोसाइटीवासी ने मासूम बच्चे का अंतिम संस्कार हुआ है या नहीं इसके बारे में भी जानना उचित नहीं समझा। हंगामे में शामिल लोग केवल मीडिया के कैमरों के सामने बाइट देकर लगातार अपनी सुरक्षा का रोना ही रोते हुए दिखाई दिए।