Noida News : अगस्त क्रांति में जब गांधीजी ने अख्तियार कर लिया था भगत सिंह का रूप: देवेंद्र अवाना
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:05 PM
Noida : नोएडा। भारतीय सोशलिस्ट मंच की ओर से अगस्त क्रांति पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पदयात्रा भी निकाली गई। सेक्टर-11स्थित मंच के प्रदेश कार्यालय में अगस्त क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा अन्याय के खिलाफ मोर्चा खोलने का निर्णय लिया गया। मंच के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र सिंह अवाना ने कहा कि अगस्त क्रांति में गांधी जी के मन में अंग्रेजों के प्रति इतना गुस्सा था कि उन्होंने करो या मरो का नारा दे दिया था।
भारतीय सोशलिस्ट मंच के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र अवाना ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों ने भारत से समर्थन मांगा था और वादा किया था कि युद्ध के बाद वे देश को आजाद का देंगे। लेकिन, जब अंग्रेज अपने वादे से मुकर गए तो महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन छेड़ दिया। उस समय मुस्लिम लीग, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और हिंदू महासभा ने भारत छोड़ो आंदोलन से दूरी बनाकर रखी थी। उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन इतना आक्रामक था कि आंदोलनकारियों से निपटने के लिए अंग्रेजों ने पहली बार सेना को सड़कों पर उतार दिया था। अंग्रेजी सेना की 57 बटालियनों ने देश के तमाम हिस्सों में दमन चक्र चलाया था। इन सैनिकों ने तमाम महिलाओं के साथ बदसलूकी की और दुराचार किया। देवेंद्र अवाना ने कहा कि अगस्त क्रांति में गांधी जी बहुत उद्विग्न थे। स्वभाव के विपरीत तल्ख भी थे। यह भी कहा जा सकता है कि भारत छोड़ो आंदोलन में गांधी जी, भगत सिंह बन गए थे। श्री अवाना ने कहा कि अगस्त क्रांति में सारे फैसले जनता के हाथ में थे। सारे प्रतिबंधों और सुरक्षा इंतजामों को धता बताकर अरूणा आसफ अली ने बम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान में 9 अगस्त की सुबह तिरंगा फहराकर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। हड़ताल, धरना, प्रदर्शन, बहिष्कार के साथ शहरों से शुरू हुआ आंदोलन अगस्त के मध्य में सुदूर गांवों तक पहुंच गया। किसान-मजदूर घरों-खेतों से निकल पड़े।
गौतमबुद्धनगर के जिलाध्यक्ष देवेंद्र गुर्जर ने कहा कि अगस्त क्रांति में छात्र-युवक सब सड़कों पर थे। छोटे-छोटे बच्चे ”करो या मरो” और “अंग्रेजों भारत छोड़ो” के नारे लगाते सड़कों-गलियों में घूम रहे थे। रेलवे स्टेशन, डाकघर, थाने फूंके गए। रेल पटरियां काट दी गईं। तार-खम्भे उखाड़ फेंके गए। ब्रिटिश सत्ता के प्रतीक चिन्हों पर लोगों का गुस्सा फूटा। अनेक स्थानों पर अपनी सरकारों की स्थापना हुई। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया-ऊषा मेहता ने गुप्त रेडियो स्टेशन चलाया था। उसके प्रसारण ने हलचल मचा दी। गिरफ्तारी के पहले ऊषा ने सभी उपकरण नष्ट कर दिए। वह तीन साल जेल में रहीं, लेकिन तमाम यतनाओं के बाद भी किसी साथी का नाम नहीं बताया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और उनके कुछ साथी हजारीबाग जेल से फरार हो गए और भारत-नेपाल सीमा पर छापामार लड़ाई छेड़ी। उन्होंने कहा कि अंग्रेज इस नागरिक आंदोलन को पूरी सख्ती से कुचलने में लगे थे। जनता से निपटने के लिए पहली बार सेना को सड़कों पर उतार दिया गया। उसकी 57 बटालियनों ने देश के तमाम हिस्सों में दमन चक्र चलाया था। 16 और 17 अगस्त को दिल्ली में 47 स्थानों पर सेना-पुलिस ने गोलियां चलाईं थीं। उत्तर प्रदेश में 29 स्थानों पर पुलिस-सेना की फायरिंग में 76 जानें गईं, सैकड़ों जख्मी हुए। मैसूर में सिर्फ एक प्रदर्शन में 100 से अधिक लोग शहीद हुए। पटना में एक सरकारी भवन पर तिरंगा फहराने के दौरान आठ छात्रों को गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया गया था। लगभग सभी बड़े शहरों में सैकड़ों स्थानों पर सेना-पुलिस ने फायरिंग कर हजारों जानें ले ली थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बीजेपी राज में अराजकता का माहौल है, यह अंग्रेजों के दमन चक्र को याद दिला रहा है। ये लोग अंग्रेजी हुकूमत की तरह सरकार चला रहे हैं। अब देश में फिर से अगस्त क्रांति जैसे आंदोलन की जरूरत है।
इस मौके पर मंच के प्रवक्ता चरण सिंह राजपूत, नरेंद्र शर्मा, हीरा लाल यादव, रामवीर यादव, कर्मवीर अवाना, विक्की तंवर, रज्जे गुर्जर, सतीश अवाना, मेहराजुद्दीन उस्मानी, अरविंद चौहान, विक्की तंवर, रामवीर यादव, एलके मिश्रा, दाता राम पाल, मनोज अवाना, पवन शर्मा, हेमंत अवाना, सतीश शर्मा, मनोज प्रजापति, मोहम्मद यामीन, उस्मान भड़ाना, फिरोज, राजेंद्र और समीर आदि मौजूद रहे।