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Supreme Court : जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने आरोपी छात्रा की ओर से पेश वकील से इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा।

Noida Protest News : सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को एक छात्रा को जमानत देने से इनकार कर दिया। स्टूडेंट पर 13 अप्रैल को नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील से इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा।
पीटीआई के मुताबिक बेंच ने कहा, "आप हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके यहीं आ जाता है। सुप्रीम कोर्ट में 93,000 मामले पेंडिंग हैं।"
अदालत में और क्या हुआ?
चौधरी की ओर से पेश वकील ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए थे और इसी दलील पर जमानत की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने केशव आनंद की ओर से दायर एक याचिका पर पुलिस अधिकारियों को नोटिस भी जारी किया। याचिका में आनंद ने उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों पर प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था।
नोएडा की एक अदालत ने इससे पहले 13 अप्रैल को औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने की आरोपी तीन महिलाओं—चौधरी, मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता—की सशर्त पुलिस रिमांड की अनुमति दी थी। कोर्ट उनके वकीलों को भी जांच की कार्यवाही के दौरान मौजूद रहने की अनुमति दी थी।
मजदूरों का आंदोलन हो गया था हिंसक
पिछले महीने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर मजदूरों का प्रदर्शन नोएडा के कुछ हिस्सों में हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न इंडस्ट्रियल यूनिट्स के कई मजदूर वेतन संशोधन की अपनी पुरानी मांग को लेकर इक्ट्ठा हुए थे और उन्होंने प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए थे। लेकिन प्रदर्शन हिंसा में बदल गया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की, पथराव किया और एक वाहन में आग लगा दी।
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