Noida:रात्रि में जागना युवाओं को बीमारी का शिकार बना रही है: डॉ. ए.के. शुक्ला
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 08:36 PM
नोएडा। लोगों की भागदौड़ भरी जिंदगी वहीं रात्रि में देर से सोना और देर रात तक मोबाइल देखना युवाओं के लिए जी का जंजाल बन गया है। इसी के चलते युवा डायबिटीज, ब्लड प्रेशर एवं कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। क्योंकि पूर्व में लोग जल्द सोते और पूरी नींद करने के बाद सुबह जल्दी उठते थे। जबकि शहरों में यह दिनचर्या अलग है। यहां रात्रि 1:00 बजे के बाद ही लोग सो पाते हैं। युवाओं में बढ़ती समस्याओं को लेकर एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया द्वारा वार्षिक सम्मेलन सेक्टर 18 स्थित रेडिसन होटल में आयोजित किया जा रहा है।
इसके संबंध में जानकारी देते हुए एपीआई के संयुक्त सचिव एवं मेट्रो अस्पताल के इंटरनल मेडिसीन एक्सपर्ट डॉ एस चक्रवर्ती ने बताया कि सम्मेलन में दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश भर से लगभग 250 विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहेंगे। इसके अलावा यूके ,अमेरिका, मलेशिया, फ्रांस ,जर्मनी ,जापान समेत कई देशों के एक हजार से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टर वर्चुअल तरीके से हिस्सा लेंगे।
कैलाश अस्पताल के प्रमुख फिजीशियन डॉक्टर एके शुक्ला ने बताया कि बच्चे रात में ठीक से नहीं सो पाते। जबकि उन्हें 7 से 8 घंटे सोना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पाती तो वे आगे चलकर ब्लड शुगर, कैंसर ,हार्ड अटैक आदि बीमारियों से पीडि़त हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पुरानी पद्धति के अनुसार शाम को खाना जल्दी खाया जाता है और जल्दी सोया जाता है। जिसकी वजह से वहां के बच्चे बीमार कम होते हैं। बच्चे देर रात तक कंबल के अंदर मोबाइल देखते रहते हैं। जिससे वह भी अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते और बीमारी के शिकार रहते हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी पद्धति के अनुसार अगर जल्द सोया जाए और जल्द उठा जाए तो कम ही बीमार होंगे। अब पुरानी पद्धति को लोग भूलते जा रहे हैं। जिससे बीमारी के शिकार हो रहे हैं।
मैक्स अस्पताल की डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि सम्मेलन का विषय क्रोनामेडिसन है जिसका का मतलब समय और मेडिसन का मतलब दवा से है। दैनिक दिनचर्या जो कि प्राकृतिक घड़ी सूर्य और चंद्रमा के अनुसार आज की कृत्रिम रोशनी और लगातार रात में जागने एवं देर रात भोजन करने की वजह से बाधित हो गई है।
पत्रकार वार्ता में डॉ समीर गुप्ता ने बताया कि बदलती जीवनशैली तनाव, मोटापा तथा शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण है। लोगों को जंक फूड का क्रेज बढ़ता जा रहा है। इसके कारण मोटे बच्चों के बड़े होने पर उनमें हाइपरटेंशन की आशंका बढ़ जाती है। यदि समय पर उपचार न किया जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। उक्त रक्तचाप के कारण हृदय रोग ,गुर्दे का फेल होना ,लकवे के मामले बढ़ रहे हैं। कई बार लोगों को इस बात का भी पता नहीं चलता कि वह उक्त रक्तचाप से ग्रस्त हैं।