
उत्तर भारत अब तक की सबसे भीषण बारिश और बाढ़ की चपेट में है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदा ने चार दशक में सबसे बड़ा कहर बरपाया है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदा ने पिछले चार दशकों में सबसे बड़े विनाश का रूप ले लिया है। अब तक 400 से अधिक लोगों की मौत और 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया है। North India Floods 2025
कुल्लू, मंडी और किन्नौर जिलों में लगातार बादल फटने और भूस्खलन से सड़कें ध्वस्त हो गईं। पहाड़ों से मलबा नदियों में बहा और ब्यास व सतलज जैसी नदियों ने कई तटबंध तोड़ दिए। 250 से अधिक सड़कें बह गईं, जिनमें चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग भी शामिल है। नाथपा झकरी जलविद्युत परियोजना में गाद भरने से टर्बाइन बंद करनी पड़ी। शिमला और कुल्लू के सेब के बागों को भारी नुकसान हुआ; अनुमान है कि 10,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि बर्बाद हो गई। 31 अगस्त तक हिमाचल में 220 से अधिक लोगों की मौत और 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
राजौरी और पूंछ में चिनाब और झेलम नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। कई पुल टूटने से गांव अलग-थलग पड़ गए। श्रीनगर में लोग 2014 की बाढ़ की यादें ताजा होने के डर से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किए गए। राज्य में 40,000 घर और 90,000 हेक्टेयर धान की फसलें बर्बाद हुई हैं। प्रारंभिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर को 6,500 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। North India Floods 2025
भाखड़ा नांगल बांध से छोड़े गए अतिरिक्त पानी ने सतलज नदी में उफान ला दिया। रोपड़, लुधियाना, जालंधर और फिरोजपुर में बाढ़ का कहर बरपा। घग्गर और रावी नदियों ने स्थिति और गंभीर बना दी। 30 अगस्त तक 1,800 से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं और 2,50,000 हेक्टेयर खेतों में पानी भर गया। फसल नुकसान का अनुमान 9,000 करोड़ रुपये है। पोल्ट्री फार्मों में दस लाख से अधिक पक्षी मरे। डेयरी उद्योग को दूध की कमी का सामना करना पड़ा। 1,20,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए और हजारों घर पूरी तरह बह गए। लुधियाना का होजरी उद्योग और फगवाड़ा व अमृतसर के खाद्य प्रसंस्करण केंद्र भी प्रभावित हुए।
राज्य सरकारों और केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, तीनों राज्यों में कुल नुकसान 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है। बीमा कंपनियां हजारों करोड़ रुपये के क्लेम की तैयारी में हैं। केंद्र सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की अंतरिम राहत जारी की है, लेकिन सड़कें, पुल, बिजली लाइनें, सिंचाई नहरें और पेयजल ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए इससे अधिक राशि की आवश्यकता होगी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, रुके हुए मानसून ने बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाओं का एक कन्वेयर बेल्ट बनाया, जबकि पश्चिमी विक्षोभ ने इसे और तीव्र किया। पहाड़ों में बादल फटे और मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई, जिससे पहले से पिघल रहे ग्लेशियरों की नदियों ने भीषण रूप लिया।
जलवायु वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अब ऐसी चरम घटनाएं नियमित हो रही हैं। हिमालय, वैश्विक औसत से दोगुनी गति से गर्म हो रहा है, बर्फ तेजी से पिघल रही है और बाढ़ का खतरा बढ़ा है। वनों की कटाई, खनन और नदी तटों पर अनियोजित निर्माण प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को और बढ़ा रहे हैं। अब तक 400 से अधिक लोगों की मौत और दस लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। स्कूल-कॉलेज बंद हैं, राहत शिविर भरे हुए हैं और जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है। हिमाचल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के लोग अपने घरों से मलबा हटाने और सरकारी मदद के वादों के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं। North India Floods 2025