अब किसी भी हाल में नहीं बचेंगे अंबानी! ED का डबल एक्शन शुरू
Anil Ambani
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 02:20 PM
रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ₹17,000 करोड़ के बैंक लोन फ्रॉड मामले में पहले ही जांच का सामना कर रहे अनिल अंबानी अब एक नए विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को ₹68.2 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी के मामले में बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने ओडिशा और कोलकाता में एक साथ छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए। Anil Ambani
फर्जी बैंक गारंटी के जरिए मिला सरकारी ठेका?
ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी समूह की दो कंपनियों रिलायंस न्यू बेस लिमिटेड और महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड ने भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) से ठेका पाने के लिए फर्जी बैंक गारंटी का सहारा लिया। इस गारंटी को ओडिशा की एक निजी कंपनी मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार किया था। बताया जा रहा है कि इस गारंटी के लिए लगभग 8% कमीशन दिया गया, जिसके लिए अनिल अंबानी की कंपनियों ने फर्जी बिल भी बनाए।
छापेमारी में मिले कई फर्जी दस्तावेज
ईडी ने भुवनेश्वर में बिस्वाल ट्रेडलिंक और उसके निदेशकों के तीन ठिकानों पर छापे मारे वहीं कोलकाता में भी उसके एक सहयोगी के परिसर की तलाशी ली गई। इस दौरान कई अघोषित बैंक खातों और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। ईडी को यह भी जानकारी मिली कि संबंधित कंपनियां सिर्फ कागजी थीं और जिन पते पर इन्हें रजिस्टर्ड दिखाया गया वे वास्तव में उनके रिश्तेदारों के आवास निकले।
नकली ईमेल डोमेन से की गई सरकारी संस्था से बातचीत
इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अनिल अंबानी की कंपनियों ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का नकली डोमेन "s-bi.co.in" इस्तेमाल किया और इसे असली सरकारी डोमेन "sbi.co.in" बताकर SECI को गुमराह करने की कोशिश की। ईडी ने अब नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) से इस नकली डोमेन की रजिस्ट्री डिटेल्स मांगी हैं।
पुराने केस से भी जुड़ रहे हैं तार
जांच में यह भी पाया गया कि बिस्वाल ट्रेडलिंक के निदेशक और उनसे जुड़े लोग संवेदनशील बातचीत के लिए टेलीग्राम ऐप का उपयोग करते थे और 'डिसअपीयरिंग मैसेज' फीचर ऑन कर बातचीत करते थे, जिससे जांच एजेंसियों से बचा जा सके। ईडी का कहना है कि यह नया मामला उस सबूत से जुड़ा है, जो 24 जुलाई 2025 को अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के परिसरों पर की गई तलाशी के दौरान बरामद हुए थे। इससे यह साफ हो रहा है कि फर्जीवाड़ा सिर्फ बैंक लोन तक सीमित नहीं था, बल्कि गारंटी और सरकारी ठेकों तक फैला हुआ था।
गौरतलब है कि ईडी ने इससे पहले अनिल अंबानी को ₹17,000 करोड़ के लोन फ्रॉड केस में पूछताछ के लिए समन जारी किया है और उन्हें 5 अगस्त को दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में पेश होने को कहा गया है। यह मामला अब केवल वित्तीय अनियमितताओं का नहीं, बल्कि एक बड़े स्तर पर चल रही संगठित धोखाधड़ी का संकेत दे रहा है। एजेंसियों की नजर अब इस बात पर है कि क्या इन दोनों केसों के तार और भी बड़ी साजिश से जुड़े हैं।