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2017 में जीएसटी लागू करते समय वन नेशन, वन टैक्स का नारा दिया गया था। लेकिन पेट्रोल और डीजल अभी भी इस व्यवस्था से बाहर हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग टैक्स होने की वजह से ईंधन की कीमतों में भारी अंतर देखने को मिलता है।

One Nation, One Tax : 2017 में जीएसटी लागू करते समय वन नेशन, वन टैक्स का नारा दिया गया था। लेकिन पेट्रोल और डीजल अभी भी इस व्यवस्था से बाहर हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग टैक्स होने की वजह से ईंधन की कीमतों में भारी अंतर देखने को मिलता है। उनका तर्क है कि अगर पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आ जाएं तो पूरे देश में कीमतें लगभग एक समान हो सकती हैं। देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम आदमी की जेब पर भारी असर डालना शुरू कर दिया है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अगर केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले अलग-अलग टैक्स हटाकर जीएसटी लागू कर दें, तो लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
One Nation, One Tax
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लागू किया जाता है, तो सरकार को यह तय करना होगा कि राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई कैसे होगी। क्योंकि पेट्रोलियम टैक्स से मिलने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्याणकारी योजनाओं में खर्च किया जाता है। ऐसे में टैक्स कम करने का फैसला आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा कदम माना जाएगा।
One Nation, One Tax
अगर भविष्य में पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आते हैं, तो इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिल सकता है।
* पेट्रोल और डीजल सस्ते हो सकते हैं
* ट्रांसपोर्ट लागत घट सकती है
* महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण मिल सकता है
* राज्यों में कीमतों का बड़ा अंतर खत्म हो सकता है। हालांकि यह फैसला पूरी तरह केंद्र और राज्यों की सहमति पर निर्भर करेगा।
One Nation, One Tax
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