भारत के नागरिक प्रतिदिन 45 लाख टन प्याज खा लेते हैं। भारत सरकार ने प्याज के रेट को नियंत्रित करने के लिए अनेक उपाय शुरू किए हैं। इन्हीं उपायों में “कांदा एक्सप्रेस ट्रेन” का उपाय भी शामिल है। इस विषय में भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने विस्तार से जानकारी दी है।

देशभर में बढ़ती हुई मंहगाई के कारण प्याज (Onion) की खूब चर्चा हो रही है। इसी चर्चा के बीच भारत सरकार ने बताया है कि भारत में प्रतिदिन 45 टन प्याज की खपत होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत के नागरिक प्रतिदिन 45 लाख टन प्याज खा लेते हैं। भारत सरकार ने प्याज के रेट को नियंत्रित करने के लिए अनेक उपाय शुरू किए हैं। इन्हीं उपायों में “कांदा एक्सप्रेस ट्रेन” का उपाय भी शामिल है। इस विषय में भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने विस्तार से जानकारी दी है।
आपको बता दें कि, त्योहारों से पहले खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र से ‘कांदा एक्सप्रेस’ रवाना की गई है, जबकि गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदी तत्काल प्रभाव से हटा दी गई है। दूसरी ओर, चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार पहले ही 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को रसोई के बजट में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
देश के कई हिस्सों में प्याज के दाम बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने का फैसला किया है। महाराष्ट्र से प्याज लेकर विशेष रेलवे रैक ‘कांदा एक्सप्रेस’ दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है और मंगलवार को इसके पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद प्याज को दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य प्रमुख बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार की योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, कोलकाता और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों में प्याज की खुदरा बिक्री 35 रुपये प्रति किलो की दर से की जाएगी। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) के स्टॉल के साथ-साथ मोबाइल बिक्री वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल प्याज को एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाना नहीं बल्कि बाजार में अचानक पैदा हुई आपूर्ति की कमी को दूर करना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एक फुल रेलवे रैक में करीब 42 से 58 डिब्बे हो सकते हैं जबकि मिनी रैक में लगभग 20 डिब्बे होते हैं। एक रैक से करीब 2,200 टन प्याज की ढुलाई की जा सकती है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार, सरकार के पास पर्याप्त प्याज का बफर स्टॉक है और मौजूदा भंडार त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। सरकार का मानना है कि बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचने के बाद कीमतों पर दबाव कम होगा।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि प्याज की कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोशिशों पर नजर रखी जा रही है। देश में हर दिन औसतन करीब 45 हजार टन प्याज की जरूरत होती है और सालाना खपत लगभग 1.6 से 1.7 करोड़ टन के आसपास है। सरकार के अग्रिम अनुमान के मुताबिक इस वर्ष देश में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। ऐसे में सरकार का दावा है कि देश में मांग के मुकाबले पर्याप्त उत्पादन और स्टॉक उपलब्ध है।
प्याज के बाद गेहूं को लेकर भी केंद्र ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं। अब ड्यूरम गेहूं समेत गेहूं, आटा, मैदा और संबंधित उत्पादों के निर्यात का रास्ता खुल गया है। सरकार ने घरेलू उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। इस साल फरवरी में सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति दी गई थी। अब आपूर्ति की स्थिति में सुधार को देखते हुए निर्यात नीति में बड़ा बदलाव किया गया है।
गेहूं निर्यात पर रोक हटने से भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवसर बढ़ सकते हैं। घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखते हुए निर्यात की अनुमति मिलने से गेहूं उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार के सामने घरेलू कीमतों और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ती है तो घरेलू आपूर्ति और कीमतों पर उसका असर पड़ सकता है। प्याज और गेहूं के साथ चीनी की कीमतों को लेकर भी सरकार ने कदम उठाए हैं। घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम करने के लिए केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। चीनी उद्योग संगठन ISMA ने भी कहा है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है और आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। संगठन के मुताबिक आयात की अनुमति और बाजार में अतिरिक्त उपलब्धता से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
सरकार के ताजा फैसलों का सीधा असर आम उपभोक्ता की रसोई पर पड़ सकता है। प्याज की अतिरिक्त आपूर्ति से जहां कीमतों में तेजी को रोकने की कोशिश होगी, वहीं चीनी के शुल्क-मुक्त आयात से बाजार में उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। गेहूं निर्यात से प्रतिबंध हटने का असर हालांकि अलग तरीके से दिखाई देगा, क्योंकि इससे किसानों और व्यापारियों को नए बाजार मिलेंगे। फिलहाल सरकार का फोकस आपूर्ति बढ़ाने, जमाखोरी रोकने और त्योहारी सीजन में खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने पर है।
उत्तर प्रदेश में भी प्याज और चीनी की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं की नजर सरकार के इन कदमों पर रहेगी। खासकर त्योहारों के दौरान घरेलू खपत बढ़ने के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अचानक उछाल आम परिवारों का बजट बिगाड़ देता है। अब देखना होगा कि महाराष्ट्र से दिल्ली और अन्य शहरों तक पहुंचने वाली प्याज की अतिरिक्त खेप तथा चीनी के आयात का असर खुदरा बाजार में कितनी तेजी से दिखाई देता है। सरकार की कोशिश सफल रहती है तो आने वाले दिनों में प्याज और चीनी की महंगाई से आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है।
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