
Opposition Parties Meeting[/caption]
पिछले दो महीनों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी दलों के नेताओं से मिलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है नितीश कुमार कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करते है तो कभी उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जिसमे नीतीश कुमार का एक मात्र संकल्प नजर आता है की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को हर हाल में हराना है। ऐसे में तब जब बीजेपी कर्नाटक चुनाव हार कर आ रही है तो तमाम विपक्षी नेताओं का मनोबल बढ़ा हुआ है
विपक्षी एकता की राह में रोड़े
बैठक में नहीं जायेंगे जयंत, मायावती भडक़ीं
2024 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता में अभी भी कई रोड़े हैं। कल 23 जून को पटना में होने वाली विपक्ष की बैठक को लेकर बड़ी खबर आमने आ रही है। इस बैठक में राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी शामिल नहीं होंगे। इसको लेकर उन्होंने पत्र जारी किया है। जयंत चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर कहा है कि वह 23 जून को पटना में होने वाली बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। वहीं बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती को भी नहीं बुलाया गया है। जिसके बाद वह विपक्षी एकता तथा नीतीश कुमार पर जमकर भडक़ीं। विपक्षी दलों की बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती को नहीं बुलाया गया है। इस पर मायावती ने आज सुबह लगातार 4 टवीट करते हुए नीतीश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि दिल मिले न मिले हाथा मिलाते रहिए। मायावती ने कहा कि विपक्षी दल जनता में विश्वास स्थापित करने में विफल साबित हुए हैं। बिना प्राथमिक तैयारी के विपक्ष को जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। विपक्ष बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुददों से जनता का ध्यान हटा रही है। उधर इस बैठक को लेकर पोस्टरबाजी भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी द्वारा पटना में लगाए गए पोस्टरों में कांग्रेस के नेताओं की तस्वीर नहीं है।
बता दें कि कल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक होनी है। इससे पूर्व जयंत चौधरी ने बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई है। इसकी वजह उन्होंने पूर्व निर्धारित पारिवारिक कार्यक्रम को बताया है। लेकिन जयंत चौधरी ने पत्र के माध्यम से यह विश्वास जताया है कि मुझे विश्वास है कि यह बैठक विपक्षी एकता की राह में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगी।
जयंत चौधरी ने पत्र में लिखा है कि आज देश में अधिनायकवादी और साम्प्रदायिक शक्तियां जिस तरह लोकतंत्र तथा सामाजिक समरसता के लिए खतरा पैदा कर रही हैं, उसे देखते हुए समानधर्मा विपक्षी दलों का एकजुट होना समय की मांग है। देश की अहम समस्याओं और चुनौतियों पर संवाद कर समूचा विपक्ष जनता के सामने एक दूरगामी, व्यावहारिक योजना प्रस्तुत कर सकता है।
ऐसे हम साथ मिलकर युवा, महिलाएं, किसान और वंचित समाज की आकांक्षाओं और विश्वास के साथ देश में सार्थक परिवर्तन ला सकते हैं।