कौन हैं वो 8 सांसद, जिन्हें पूरे सत्र से सस्पेंड किया गया?

सभी पर आरोप है कि उन्होंने सदन की मर्यादा भंग की और कार्यवाही में बाधा पहुंचाई। कार्रवाई के बाद निलंबित सांसदों ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुरदीप सिंह औजला ने निलंबन को गलत कदम बताते हुए कहा कि वे इस फैसले का विरोध करेंगे और जनता की आवाज उठाते रहेंगे।

8 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित
8 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar03 Feb 2026 03:54 PM
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Lok Sabha MP Suspension : मंगलवार को संसद की कार्यवाही के दौरान लोकसभा का माहौल अचानक गरमा गया। नेता विपक्ष राहुल गांधी को टोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों का आक्रोश खुलकर सामने आया और आरोप है कि इसी बीच स्पीकर की ओर कागज उछाले गए। हालात बिगड़ते देख स्पीकर ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत सख्त कदम उठाया और 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया।

किन सांसदों पर गिरी गाज?

निलंबित किए गए सांसदों में मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, अमरिंदर राजा वडिंग, हिबी ईडन, किरण रेड्डी, प्रशांत पोडोले, एस. वेंकटेश्वरन और जीन कोरियाकोस शामिल हैं। सभी पर आरोप है कि उन्होंने सदन की मर्यादा भंग की और कार्यवाही में बाधा पहुंचाई। कार्रवाई के बाद निलंबित सांसदों ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुरदीप सिंह औजला ने निलंबन को गलत कदम बताते हुए कहा कि वे इस फैसले का विरोध करेंगे और जनता की आवाज उठाते रहेंगे। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें बोलने से रोका गया, जबकि सरकार का पक्ष है कि हंगामा और अमर्यादित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। घटनाक्रम के बाद भाजपा की ओर से स्पीकर से औपचारिक शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई। पार्टी ने सदन में हंगामा करने और स्पीकर की ओर कागज उछालने की घटना को गंभीर बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग रखी थी।

राहुल गांधी के बयान पर अड़े रहने से बढ़ा तनाव

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला देकर सदन में अपनी बात रखना चाहते थे। लेकिन स्पीकर के बार-बार हस्तक्षेप के बाद वह अपने मुद्दे पर डटे रहे और लगातार उसी संदर्भ को दोहराते नजर आए। जैसे-जैसे बहस तेज होती गई, वैसे-वैसे शोर-शराबा भी बढ़ता चला गया और अंततः व्यवधान की स्थिति इतनी बिगड़ी कि लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। Lok Sabha MP Suspension

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NDA बैठक में पीएम मोदी का हमला, कहा— आलोचना करने वाले अब परिणाम देखें

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ट्रेड डील से देश में सकारात्मक व्यापारिक माहौल बना है, जिसका सीधा लाभ भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और रोजगार सृजन को मिलेगा। उन्होंने सांसदों से ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।

India-US Trade Deal
वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ भारत (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Feb 2026 01:43 PM
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India-US Trade Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ संपन्न हुई व्यापारिक समझौते को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “नई सुबह” करार देते हुए कहा कि वैश्विक मंच पर भारत के प्रति भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। मंगलवार को संसद परिसर में आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लगातार आलोचनाओं के बावजूद सरकार ने धैर्य बनाए रखा और आज उसी का सकारात्मक परिणाम देश के सामने है।

एनडीए सांसदों और कार्यकर्ताओं ने अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने और सफल ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत और सम्मान किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जब हम इस दिशा में ईमानदारी से काम कर रहे थे, तब कुछ लोग लगातार हमारी आलोचना कर रहे थे, लेकिन हमने धैर्य रखा और आज उसका परिणाम सबके सामने है।

सात प्रमुख देशों का भारत पर भरोसा: किरेन रिजिजू

बैठक में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है कि दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियां भारत के साथ व्यापारिक समझौते कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार अब तक यूरोपीय यूनियन, यूएई, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, यूके, न्यूजीलैंड और अमेरिका सहित सात बड़े देशों और क्षेत्रों के साथ सफल ट्रेड डील कर चुकी है। रिजिजू ने कहा कि ये समझौते इस बात का प्रमाण हैं कि वैश्विक समुदाय को भारत की आर्थिक नीतियों और भविष्य की संभावनाओं पर पूरा भरोसा है।

मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ट्रेड डील के बाद देश में मैन्युफैक्चरिंग को नई गति देने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय कंपनियों से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया, ताकि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बन सकें। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी बाजार में अवसर बढ़े हैं, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

सांसदों को मिला ‘होमवर्क’

प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसद की कार्यवाही में नियमित उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने बजट 2026 की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और ट्रेड डील से मिलने वाले लाभों तथा रोजगार के अवसरों के बारे में लोगों को जागरूक करने को कहा।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के विजन को जमीन पर उतारने में सांसदों की भूमिका सबसे अहम है। India-US Trade Deal

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जिंदगी और मौत एक छत के नीचे, जाने आगरा के गांव की दर्दनाक कहानी

आगरा छह पोखर गांव की सच्चाई ऐसी है, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं। छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है, जहां लोग जिंदगी भी अपने घरों में गुजारते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है।

Six Pokhar village in Agra
आगरा के छह पोखर गांव में अनोखी मजबूरी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Feb 2026 12:41 PM
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उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा। यहां एक गांव ऐसा है, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं। गांव के लगभग हर मुस्लिम परिवार के घर में किसी न किसी अपने की कब्र बनी हुई है। हम बात कर रहे हैं आगरा से करीब 30 किलोमीटर दूर किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित छह पोखर गांव की। बाहर से यह गांव किसी आम गांव जैसा ही नजर आता है, लेकिन जैसे ही इसकी गलियों में कदम रखते हैं, हकीकत भीतर तक झकझोर देती है।

कब्र के पास जलता है चूल्हा

बता दें कि गांव में रहने वाले करीब 15 मुस्लिम परिवारों के घरों में कब्रें बनी हैं। कहीं रसोई के पास तो कहीं आंगन में, कब्र के सामने ही चूल्हा जलता है और रोजमर्रा की जिंदगी चलती है। जहां बच्चे खेलते हैं, वहीं किसी मां, पिता या मासूम की आखिरी आरामगाह बनी हुई है।

मजबूरी बनी परंपरा

बता दें कि ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई धार्मिक परंपरा या रिवाज नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मजबूरी है। गांव में मुस्लिम समुदाय के लिए कोई कब्रिस्तान नहीं है। अधिकांश लोग जमीन के मालिक नहीं हैं, ऐसे में जब किसी की मौत हो जाती है तो मजबूरन अपने ही घर में गड्ढा खोदकर शव को सुपुर्द-ए-खाक करना पड़ता है। एक ग्रामीण ने बताया कि उनके घर में पत्नी और मासूम बच्ची की कब्र है। बात करते समय उनकी आंखें भर आती हैं। उनका कहना है,जब दफनाने की कोई जगह ही नहीं थी, तो इंसान क्या करता?

कब्रों के बीच पलते बच्चे

बता दें कि गांव में बच्चे कब्रों के ऊपर खेलते नजर आते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी मौत की खामोश मौजूदगी के बीच चल रही है। रात के वक्त कई परिवारों को डर और खौफ के साए में रहना पड़ता है, लेकिन मजबूरी के आगे सब खामोश हैं।

2 गज जमीन का सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन गरीब मुस्लिम परिवारों को इंसान की आखिरी जरूरत 2 गज जमीन भी नसीब नहीं होगी? छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है, जहां लोग जिंदगी भी अपने घरों में गुजारते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है।

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