
79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से तिरंगा फहराने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तारीफ ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर संघ की प्रशंसा करना देश के स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों की याद का अपमान है। ओवैसी ने इसे न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से गलत ठहराया, बल्कि देश में फैली नफरत और बंटवारे की चेतावनी भी दी। India News In Hindi
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर संघ की प्रशंसा करना देश के स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों के बलिदान का अपमान है। उनका आरोप है कि RSS और उसके वैचारिक सहयोगी कभी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय नहीं रहे और ब्रिटिश साम्राज्य के हितों में खड़े रहे। ओवैसी ने कहा, “गांधीजी से उतनी ही नफरत RSS को थी जितनी कभी उन्होंने ब्रिटिशों नहीं की। ओवैसी ने कहा कि चीन हमारे लिए बाहरी खतरा है, लेकिन उससे भी बड़ा खतरा अंदर से फैली नफरत और समाज में बंटवारा है। उन्होंने हिंदुत्व की विचारधारा को संविधान के समावेशी मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि अगर इतिहास की सही समझ और असल नायकों के सम्मान को नहीं अपनाया गया, तो कायरता को बहादुरी के रूप में पेश किया जाएगा।
CPI-M के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि पीएम मोदी का लाल किले से RSS की तारीफ करना बेहद चिंताजनक और अफसोसनाक है। उन्होंने संघ को संदिग्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड वाला संगठन करार देते हुए कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया था। बेबी ने आरोप लगाया कि RSS ने कभी स्वतंत्रता संग्राम में योगदान नहीं दिया और हमेशा धार्मिक आधार पर राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने का प्रयास किया।बेबी ने कहा, “इस स्वतंत्रता दिवस पर RSS की तारीफ करके पीएम मोदी ने हमारे शहीदों और स्वतंत्रता आंदोलन की भावना का अपमान किया है। यह न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि शर्मनाक भी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में RSS के इतिहास को गौरवपूर्ण बताया और इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन कहा। उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों की राष्ट्र सेवा की सराहना की और कहा कि RSS ने ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ के सिद्धांत को लेकर पिछले 100 सालों तक काम किया। India News In Hindi