PADAMSRI AWARD: श्रीनगर। इस साल पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित संतूर शिल्पकार गुलाम मोहम्मद जाज ने अपनी कला को पहचान मिलने ने पर बृहस्पतिवार को प्रसन्नता जताई लेकिन उन्हें कहा कि ऐसा लगता है कि यह सम्मान उन्हें देर से मिला।
PADAMSRI AWARD
उन्होंने कहा, मैं पद्मश्री पाकर बहुत खुश हूं लेकिन मुझे और अधिक खुशी होती यदि यह पुरस्कार उस समय मिलता जब मेरे दादा, मेरे पिता या मेरे चाचा जीवित होते और वे इन यंत्रों को बना रहे होते। जाज (81) ने यहां अपने घर में कहा, मैं उनके सामने कुछ भी नहीं हूं। मैंने जो कुछ भी सीखा, उनसे सीखा। उन्होंने कहा कि वह संतूर सहित विभिन्न संगीत वाद्ययंत्र बनाते रहेंगे जब तक उनका जीवन रहेगा।
उन्होंने कहा, इस पुरस्कार ने मेरे विश्वास को बहाल किया है कि ऐसे लोग हैं जो ऐसे काम की सराहना करते हैं। यह एक मर रही कला है। आखिरकार, किसी ने इसके लिए आवाज उठाई है।
जाज ने कहा कि वह अपने परिवार की आठवीं पीढ़ी हैं जो तार वाले वाद्ययंत्र बना रहे हैं। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि यह हमारे परिवार में कैसे आया। कुछ लोग कहते हैं कि मुगल बादशाह औरंगज़ेब के शासनकाल के दौरान आया जबकि अन्य कहते हैं कि यह उन शिल्पों में से एक था जो मीर सैयद अली हमदानी (14 वीं शताब्दी के इस्लामिक उपदेशक, कवि और यात्री) के साथ कश्मीर आया। उन्होंने नयी पीढ़ियों द्वारा इस कला में रुचि नहीं दिखाने पर निराशा जताई लेकिन यह भी उम्मीद व्यक्त की कि कोई इसे आगे बढ़ाएगा और इसे मरने नहीं देगा।