पंडित नेहरू ने रखी विकसित भारत की नींव, याद कर रहा है देश
Jawaharlal Nehru
भारत
चेतना मंच
27 May 2025 07:32 PM
Jawaharlal Nehru : भारत के इतिहास में ऐसे कुछ ही व्यक्तित्व हैं जिन्होंने न केवल देश की आजादी की लड़ाई में नेतृत्व किया, बल्कि आजाद भारत की दिशा और दशा को भी गहराई से प्रभावित किया। पंडित जवाहरलाल नेहरू उन्हीं महान व्यक्तियों में से एक थे। वे न केवल भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के एक अग्रणी सेनानी, दूरदर्शी नेता, कुशल वक्ता और बच्चों के प्रिय "चाचा नेहरू" भी थे।
ऐसा था प्रारंभिक जीवन
पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद , शहर में हुआ था। उनके पिता मोतीलाल नेहरू एक प्रसिद्ध वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। उनकी माता स्वरूप रानी थीं, जो एक धार्मिक और संस्कारी महिला थीं। नेहरू जी का पालन-पोषण एक समृद्ध और शिक्षित परिवार में हुआ, जहाँ आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों का समावेश था। उन्होंने बचपन से ही शिक्षा, विज्ञान, राजनीति और दर्शन के प्रति रुचि दिखाई। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त की । आप को बता दे 15 वर्ष की उम्र में वे इंग्लैंड चले गए । जहाँ उन्होंने हैरो स्कूल में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने इटन कॉलेज और फिर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, जहाँ उन्होंने प्राकृतिक विज्ञान में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने लंदन के इनर टेम्पल से कानून की पढ़ाई की
1912 में जब पंडित नेहरू भारत लौटे
इसके बाद सन् 1912 में पंडित नेहरू भारत लौटे। भारत आ कर उन्होंने वकालत शुरू की, लेकिन उनकी इच्छा राजनीति और समाज सेवा की ओर अधिक थी। भारत लौटने के कुछ समय बाद, पंडित नेहरू का संपर्क राष्ट्रपति महात्मा गांधी से हुआ। गांधीजी के विचारों और कार्यशैली से नेहरू अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी शुरू की। वे 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड से अत्यंत दुखी हुए और उनका झुकाव ब्रिटिश शासन के विरोध की ओर और अधिक बढ़ा।
आजादी में उनका योगदान
पंडित नेहरू ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच से भारतीय राजनीति में सक्रिय भागीदारी शुरू की। 1920 के दशक में उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाया। पंडित नेहरू ने गांधीजी के नेतृत्व में सन् 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। वे कई बार जेल गए। इस दौरान उन्होंने जेल में ही अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "भारत एक खोज" लिखी। सन् 1929 में लाहौर अधिवेशन में नेहरू को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। इस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई और 26 जनवरी 1930 को भारत की पहली स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया।
इसके बाद सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होनें अहम भूमिका निभाई। इस आंदोलन के दौरान उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया और लंबे समय तक जेल में रखा गया। उन्होंने युवाओं को संगठित किया, ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन फैलाया और अग्रेंजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। आजादी के पहले और बाद में नेहरू सांप्रदायिक एकता और धर्मनिरपेक्षता के मजबूत पक्षधर रहे। उन्होंने भारत - पाक विभाजन के समय हुए दंगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए और भारत को एक धर्मनिरपेक्ष देश बनाए रखने की वकालत की।
कैसा था नेहरू का जीवन ?
पंडित नेहरू का जीवन अत्यंत अनुशासित, सादा और आदर्शवादी था। वे बच्चों से बहुत प्रेम करते थे, इसलिए उनकी जयंती 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है । नेहरू जी को बच्चों से बहुत प्यार था, और बच्चे उन्हें "चाचा नेहरू" कहकर बुलाते थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उनका निधन भारत के लिए एक युग के अंत जैसा था। लेकिन उनके विचार, योजनाएं और संस्थाएं आज भी भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज भी जब हम लोकतंत्र, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक न्याय की बात करते हैं, तो नेहरू जी की नीतियाँ और दृष्टिकोण देशवासियों के लिए मार्गदर्शक के रूप में खड़े होते हैं। Jawaharlal Nehru