Parliament Attack 2001- 21 साल पहले आज ही के दिन बम के धमाकों से गूंज गया था संसद भवन, जाने क्या क्या हुआ उस दिन
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 08:49 AM
Parliament Attack 2001- साल 2001 का वह दिन जब लोकतंत्र का मंदिर यानी संसद भवन बम के धमाकों से गूंज गया था। आज इस घटना को हुए पूरे 21 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसका जख्म आज भी ताजा है। 13 दिसंबर 2001 सब कुछ सामान्य सा चल रहा था। संसद भवन में शीतकालीन सत्र की शुरुआत हो चुकी थी। राज्यसभा और लोकसभा विपक्षी सांसदों द्वारा ताबूत घोटाले को लेकर 'कफन चोर, गद्दी छोड़.... सेना खून बहाती है, सरकार दलाली खाती है...' जैसे नारों से गूंज रहा था।
संसद भवन को 45 मिनट के लिए स्थगित किया गया और उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी घर की तरफ प्रस्थान कर चुके थे। उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य कई सांसद संसद भवन में ही मौजूद थे। तभी कुछ ऐसी घटना घटी जिसने पूरे संसद भवन को हिला कर रख दिया।
Parliament Attack 2001-
13 दिसंबर 2001 को सांसद भवन पर जैश- ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकवादियों ने भवन परिसर में प्रवेश किया जिनमें से एक ने सांसद भवन के गेट पर ही खुद को बम से उड़ा दिया। उस समय संसद भवन के अंदर उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य कई सांसद मौजूद थे। आतंकवादी सफेद एंबेसडर कार से संसद भवन पर पहुंचे थे। धमाका इतनी तेज था कि आसपास की दीवारें हिल गई।
उपराष्ट्रपति के कार पर भी हुई फायरिंग -
जब यह घटना घटित हुई उस समय उपराष्ट्रपति के ड्राइवर शेखर संसद में राज्यसभा के गेट नंबर 11 के बाहर खड़े थे। धमाके की आवाज सुनते ही जब शेखर ने उस तरफ नजरें घुमाई तो उनकी कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसनी शुरू हो गई। शेखर ने किसी तरह से कार के पीछे छुप कर अपनी जान बचाई। इसके बाद उपराष्ट्रपति के सुरक्षा गार्ड ने भी मोर्चा संभाल लिया और दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई।
लालकृष्ण आडवाणी ने प्रधानमंत्री को फोन पर दी घटना की जानकारी -
जब यह घटना घटित हुई थी तब संसद भवन के कार्य को स्थगित किया गया था और प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई घर जा चुके थे। संसद भवन में जब ताबड़तोड़ फायरिंग की आवाज सुनाई दी तो उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बाहर की तरफ निकलने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रास्ते में रोका और हमले की जानकारी दी। तब उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने दफ्तर से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को फोन कर घटना की पूरी जानकारी दी।
इस धमाके में 14 लोगों की गई जान -
संसद भवन (Parliament Attack 2001) पर हुए इस बम धमाके में 14 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई ताबड़तोड़ फायरिंग में सभी आतंकवादी मारे गए। इस घटना में कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी यादव और संसद भवन के माली समेत दो अन्य सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। दिल्ली पुलिस के 6 जवान भी इस घटना में शहादत को प्राप्त हुए।
2013 में हुई अफजल को फांसी -
संसद भवन पर हुए हमले के पीछे मोहम्मद अफजल गुरु, शौकत हुसैन, एस ए आर गिलानी के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ था। साल 2013 में 9 फरवरी को 9 फरवरी को मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी की सजा दी गई।