छठ के रंग में डूबा उत्तर भारत, बाजारों की भीड़ ने बढ़ाया उत्साह
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:46 AM
लोकआस्था का महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) इस बार 25 अक्टूबर से शुरू होगा और पटना से लेकर दिल्ली तक पूरे उत्तर भारत में भक्ति और उल्लास का माहौल दिखाई दे रहा है। यमुना घाट से लेकर बिहार के हर घाट तक भक्तों की तैयारियों का जोश देखने लायक है। बाजारों में रौनक देखते ही बनती है। छठ पूजा (Chhath Puja) की तैयारी में फल, गन्ना, गुड़, चावल और पूजा सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है। बांस के सूप, दौरे और पारंपरिक टोकरी की दुकानों पर भीड़ लगी हुई है। महिलाएं पारंपरिक साड़ी में सजी-धजी व्रत की तैयारियों में जुटी हैं तो पुरुष घाटों की सफाई और सजावट में व्यस्त हैं। हर गली-गली में “छठ मइया आइलें” के गीत गूज रहे हैं वहीं घर-घर प्रसाद बनाने की खुशबू फैली हुई है। Chhath Puja
छठ पूजा का इतिहास और महत्व
छठ पूजा का इतिहास बेहद प्राचीन है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मइया की आराधना के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में कुंती और द्रौपदी ने इसे शुरू किया था। वैदिक काल में इसे सूर्यषष्ठी कहा जाता था। लोग सूर्य की उपासना कर अपने और परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते थे। यह पर्व प्रकृति, जल और ऊर्जा का सम्मान भी है जो आधुनिक जीवन में संतुलन का संदेश देता है।
इस बार छठ घाटों की सजावट बेहद आकर्षक है। रंग-बिरंगी लाइटें, फूलों की माला और मिट्टी के दीयों से घाटों को सजाया गया है। महिलाएं ‘नहाए-खाय’ से व्रत की शुरुआत कर रही हैं वहीं घरों में खरना की तैयारियों से त्योहार का माहौल बन गया है। गुड़, दूध और चावल से बनने वाला प्रसाद पूरे घरों में भक्ति और पवित्रता का अनुभव कराता है।
छठ पूजा के आते ही बाजारों में भीड़ बढ़ गई है। बांस के सूप, दौरे, पूजा की टोकरी, फल और नई साड़ियां खूब बिक रही हैं। मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ लगी हुई है। सोशल मीडिया पर #ChhathPuja2025 ट्रेंड कर रहा है और लोग अपने घाट की तैयारियों, पारंपरिक लुक और पूजा गीतों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक एकता और स्वच्छता का भी प्रतीक है। युवा और बुजुर्ग मिलकर घाटों की सफाई और सजावट में योगदान दे रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। Chhath Puja