राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रहे युवाओं पर सुरक्षाकर्मियों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया है।

राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने आवास 10 जनपथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। वह मीडिया के सामने छात्रों के प्रदर्शन में घायल एक स्टूडेंट को लेकर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह छात्र प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों की ओर से चलाई गई पैलेट गन से घायल हुआ है। घायल प्रदर्शनकारी, ने पहचान साहिल के तौर पर बताई।
राहुल गांधी ने कहा, "सरकार का दावा है कि पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया, लेकिन इसे देखिए, इस लड़के की आंख में चोट लगी है और एक आंख की रोशनी चली गई है। पैलेट गन ऐसे ही असर करती है।"
'लाठीचार्ज किया गया, बुरी तरह पीटा गया'
कांग्रेस सांसद ने कहा, “ये युवा भारत का भविष्य हैं। हजारों युवाओं पर कथित तौर पर पैलेट गन चलाई गई, लाठीचार्ज किया गया और उन्हें बुरी तरह पीटा गया, जबकि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। वे विरोध इसलिए कर रहे थे क्योंकि उनका परीक्षा पेपर लीक हो गया था। सालों की मेहनत एक पल में बर्बाद हो गई। जिनके पास 60-70 लाख रुपये थे, उन्होंने पेपर खरीद लिया, बाकी युवा बर्बादी के कगार पर छोड़ दिए गए।”
राहुल ने कहा, “मैं यह भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि इस युवा की आँख की रोशनी बच पाएगी या नहीं। इन युवाओं की कोई गलती नहीं है।”
बता दें 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद मार्च निकाला था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में 100 से ज्यादा छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
राहुल ने इस दौरान अपनी तीन मांगों को दोहराया, "शिक्षा मंत्री को तुरंत हटाया जाए। उन अधिकारियों और जवानों के खिलाफ कार्रवाई हो जिन्होंने छात्रों पर पैलेट गन चलाई और लाठीचार्ज किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन युवाओं से माफी मांगें।"
क्या होती है पैलेट गन?
पैलेट गन आमतौर पर तीन मुख्य प्रकार की होती हैं:
1-एयर पिस्टल
हैंडगन जैसी छोटी गन, जो स्प्रिंग, संपीड़ित गैस या CO₂ से चलती हैं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से टारगेट प्रैक्टिस और रीक्रिएशनल शूटिंग लिए होता है।
2-एयर राइफल
लंबे बैरल वाली राइफलें, जिनकी सटीकता बेहतर होती है। इनका उपयोग छोटे शिकार, स्पोर्ट शूटिंग और ट्रेनिंग में किया जाता है।
3-क्राउड कंट्रोल शॉटगन
12-gauge पंप-एक्शन हथियार, जिनका इस्तेमाल सुरक्षा बल भीड़ नियंत्रण के लिए करते हैं। इनमें सैकड़ों छोटे लेड, मेटल या रबड़ के पैलेट वाले कारतूस फायर किए जाते हैं।
सामान्य फायरआर्म से कैसे अलग?
ये हथियार बारूद के विस्फोट के बजाय संपीड़ित हवा या गैस से चलते हैं (हालाँकि क्राउड कंट्रोल शॉटगन में कारतूस बारूद-आधारित होते हैं)।
खतरा
क्राउड कंट्रोल पैलेट गन से दागे गए पैलेट बड़े क्षेत्र में फैलते हैं। ये शरीर के नरम ऊतकों में घुस सकते हैं और गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं। आंखों में लगने पर स्थायी अंधापन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। ये करीब 50-100 मीटर की दूरी तक प्रभावी होती हैं, लेकिन नजदीक से फायर करने पर जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।
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