
भारत सरकार की एक बड़ी योजना से भारत की जनता बहुत नाराज है। भारत सरकार की एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने की योजना को भारत की जनता फ्लॉप योजना बता रही है। भारत के ज्यादातर नागरिकों का कहना है कि भारत सरकार की एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की योजना से आम जनता की जेब पर दोहरी मार पड़ी है। भारत सरकार की एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल योजना के कारण आम जनता का पैसा तथा गाडिय़ां दोनों बर्बाद हो रहे हैं। India News In Hindi
भारत सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 20% (E20 ईंधन) करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। दावा किया जा रहा है कि यह हरित पहल प्रदूषण घटाएगी, तेल आयात बिल कम करेगी और किसानों की आय बढ़ाएगी। लेकिन आम वाहन मालिकों में इस कदम को लेकर डर का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी के अचानक E20 ईंधन थोपने से न तो ईंधन सस्ता हुआ है, न ही गाड़ियों की सेहत पर इसका असर अच्छा दिख रहा है। कई कार मालिक चिंतित हैं कि mileage (माइलेज) घटने से उनकी जेब पर बोझ बढ़ेगा और इंजन को लंबे समय में नुकसान पहुंचेगा। वाहन मालिकों का यह भी आरोप है कि उन्हें इस बदलाव के बारे में पहले से न तो विकल्प दिया गया, न सही जानकारी – मानो सरकार ने एकतरफ़ा फ़रमान जारी कर दिया हो।
भारत सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मामले में ब्राजील से भी सबक नहीं सीखा है। एथेनॉल मिश्रण के मामले में ब्राज़ील दुनिया के लिए एक मिसाल है। पिछले पचास सालों में, 1970 के दशक से शुरू करके ब्राज़ील ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल में एथेनॉल का अनुपात धीरे-धीरे बढ़ाया। आज हालत यह है कि लगभग हर ब्राज़ीलियाई पेट्रोल पंप पर उपभोक्ता के पास विकल्प होता है – वह 18-27% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल ले या शुद्ध एथेनॉल (E100) ईंधन भरे। इतना ही नहीं, वहां शुरुआती दशकों में ही वाहन निर्माता कंपनियों ने “फ्लेक्स-फ्यूल” कारें उतार दीं जो किसी भी अनुपात के पेट्रोल-एथेनॉल ईंधन पर चल सकती थीं। उपभोक्ता बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए एथेनॉल ईंधन को खास तौर पर सस्ता रखा गया – यह मिश्रित पेट्रोल से भी 25-35% तक सस्ता बिकता था।
नतीजतन, ब्राज़ील में एथेनॉल वाले ईंधन को लोगों ने हाथोंहाथ अपनाया और 1980 के दशक के अंत तक 10 में से 9 नई कारें केवल एथेनॉल पर चलने लगीं। सरकार की कीमत समर्थन नीति और उपभोक्ता को चुनने की आज़ादी ने वहां एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को सफल बना दिया। सबसे अहम बात – ब्राज़ील ने यह बदलाव धीरे-धीरे और उपभोक्ता को भरोसे में लेकर किया, ताकि पुराने वाहन मालिकों को नुकसान न हो। जैसे-जैसे एथेनॉल का प्रतिशत बढ़ाया गया, यह सुनिश्चित किया गया कि पुरानी गाड़ियों के इंजन पर बुरा असर न पड़े और उन्हें विकल्प मिले। इसके विपरीत, भारत में एथेनॉल मिश्रण को बहुत कम समय में तेज़ी से बढ़ा दिया गया है। सरकार ने 2030 तक E20 का लक्ष्य रखा था, लेकिन उसे 5 साल पहले 2025 में ही हासिल करने की घोषणा कर दी। India News In Hindi
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राज़ील जैसे मॉडल से सबक लिए बगैर यदि जल्दबाज़ी में परिवर्तन लागू किया जाता है, तो जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वर्तमान में भारत में न तो फ्लेक्स-फ्यूल वाहन आम हैं, न पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल बनाम एथेनॉल मिश्रित ईंधन चुनने का विकल्प उपभोक्ता को दिया जा रहा है – सारा ईंधन अनिवार्य रूप से E20 किया जा रहा है। नतीजा यह है कि कई गाड़ियों के इंजन एवं प्रदर्शन पर तत्काल असर पड़ने लगा है और वाहन मालिक खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। India News In Hindi
हम यहां एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के दस प्रमुख दुष्प्रभाव की जानकारी आपको बता रहे हैं। भारत की जनता में यह दुष्प्रभाव तेजी के साथ बढ़ रहे हैं।
(1) ईंधन की कीमत में कोई राहत नहीं: एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल सस्ता मिलने की उम्मीद थी,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार के अनुसार अब एथेनॉल खुद परिशोधित पेट्रोल से भी महंगा पड़ रहा है, जिससे तेल कंपनियों को लागत बचत का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में दिक्कत हो रही है। भारत में मिश्रित पेट्रोल लगभग उसी कीमत पर बेचा जा रहा है जैसे शुद्ध पेट्रोल, इसलिए जनता को कोई आर्थिक फायदा नहीं दिख रहा। उलटा, एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम घटाने से इनकार कर दिया है। India News In Hindi (2) माइलेज (ईंधन दक्षता) में गिरावट: एथेनॉल की ऊर्जा मूल्य (कैलोरिफिक वैल्यू) पेट्रोल से कम होती है,इसलिए E20 पेट्रोल से वाहनों की माइलेज घटने की शिकायतें आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नई गाड़ियों में माइलेज में थोड़ी कमी (1-2%) आ सकती है, लेकिन पुरानी गाड़ियों में माइलेज 5-7% तक गिरने का अनुमान है। माइलेज घटने का मतलब है कि अब लोगों को पहले से ज़्यादा ईंधन ख़रीदना पड़ेगा, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। (3) इंजन और पुर्ज़ों को नुकसान का जोखिम: उच्च मात्रा में एथेनॉल वाले ईंधन से इंजनों पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका है। एथेनॉल में पानी की मात्र ज़्यादा होती है,जिससे इंजन के धातु हिस्सों में जंग लग सकती है और वाल्व, पिस्टन आदि पर जमा बन सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय को भी स्वीकारना पड़ा कि पुरानी गाड़ियों में रबर सील और गैसकेट जैसे कुछ हिस्से जल्दी घिस सकते हैं और उन्हें समय से पहले बदलना पड़ सकता है। इंजिन की जिंदगी कम होने और कल-पुर्ज़ों के तेजी से खराब होने का सीधा मतलब है मेंटेनेंस का खर्च बढ़ना, जो आम आदमी के लिए डराने वाली बात है। India News In Hindi (4) सर्द मौसम में गाड़ी स्टार्ट होने में दिक्कत: ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन से गाड़ियों को ठंडे मौसम में स्टार्ट करने में परेशानी हो सकती है। एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रित ईंधन को जलने के लिए पेट्रोल की तुलना में अधिक तापमान चाहिए, जिससे खासकर सर्दियों की सुबह गाड़ी स्टार्ट होने में देरी या दिक्कत आती है। उत्तरी भारत के ठंडे राज्यों में यह समस्या लोगों को और परेशान कर सकती है। (5) पुरानी गाड़ियों के अनुकूल नहीं: भारत में2023 से पहले बिके अधिकांश वाहन E20 अनुरूप डिजाइन नहीं किए गए थे। कई लोकप्रिय कार मॉडलों के यूज़र मैनुअल साफ कहते हैं कि 10% से अधिक एथेनॉल वाला ईंधन इस्तेमाल न करें। इन गाड़ियों के इंजन, ईंधन पाइप और पुर्ज़े E20 से संतुलित तरीके से काम नहीं कर पाएंगे, जिससे उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा। जो कार या बाइक 2020 से पहले खरीदी गई हैं, उनके मालिक खास तौर पर चिंता में हैं कि कहीं E20 ईंधन उनकी गाड़ी को नुकसान न पहुँचा दे। (6) वारंटी और बीमा को लेकर अनिश्चितता: पुराने वाहन मालिकों में यह डर है कि अगरE20 ईंधन से इंजन को नुकसान हुआ, तो निर्माता कंपनी वारंटी का लाभ नहीं देगी। वास्तव में, कई कंपनियों ने अपनी पुरानी गाड़ियों की पुस्तिकाओं में लिखा है कि 10% से अधिक एथेनॉल से हुए नुकसान वारंटी दावे से बाहर हो सकते हैं। शुरुआत में तो बीमा को लेकर भी अफवाहें रहीं कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहन बीमा दावा रिजेक्ट हो सकता है, हालांकि सरकार ने सफाई दी कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से बीमा पॉलिसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फिर भी वारंटी-बीमा को लेकर उपजी आशंकाओं ने लोगों को भयभीत किया हुआ है। (7) उपभोक्ताओं के पास कोई विकल्प नहीं: भारत में उपभोक्ताओं को ईंधन का विकल्प चुनने का अधिकार फिलहाल नहीं दिया गया है। सभी पंप पर लगभग केवलE20 या उच्च मिश्रित पेट्रोल ही बेचा जा रहा है, और ग्राहक के पास शुद्ध पेट्रोल या कम मिश्रण वाला पेट्रोल लेने की सुविधा नहीं है। ब्राज़ील में उपभोक्ता खुद तय करते हैं कि उन्हें कौन सा ईंधन भराना है – वहां E100 तक विकल्प मौजूद हैं – लेकिन भारत में विकल्पहीनता ने लोगों को असहज कर दिया है। कई वाहन मालिक इसे सरकार का जबरन थोपा गया निर्णय मान रहे हैं, जिससे असंतोष और डर दोनों बढ़ रहे हैं। India News In Hindi (8) जानकारी और पारदर्शिता की कमी: एथेनॉल मिश्रण लागू करते समय जनता को जागरूक करने और सूचना देने में गंभीर कमी रही है। अधिकांश पेट्रोल पंप यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं करते कि दिए जा रहे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा कितनी है। उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चलता कि उनकी गाड़ी मेंE10 भरा जा रहा है या E20, जब तक कि वाहन का परफॉर्मेंस खुद गिर न जाए। उचित डिस्प्ले और जानकारी के अभाव में लोग ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि बिना बताए उनके ईंधन की गुणवत्ता बदल दी गई, जो पारदर्शिता के लिहाज़ से गलत है। India News In Hindi (9) खाद्य एवं जल संसाधनों पर दबाव: एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना,मक्का जैसे कृषि उत्पादों का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा रहा है। सरकार भले कहे कि वह सिर्फ शीरे (molasses) या बेकार अनाज का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन जानकार चेतावनी देते हैं कि भविष्य में खाद्यान्न और ईंधन के बीच प्रतियोगिता बढ़ सकती है – अगर कभी अनाज की कमी हुई तो पेट्रोल के लिए फसलें जुटाना मुश्किल होगा। इसके अलावा, एथेनॉल बनाने में भारी मात्रा में पानी खर्च होता है। एक आकलन के मुताबिक 1 लीटर एथेनॉल तैयार करने में करीब 2860 लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। भारत जैसे देश में जहां पानी की किल्लत पहले से है, इतना पानी जैव-ईंधन के लिए मोड़ना लंबे समय में खतरनाक साबित हो सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञ इस नीति के प्रच्छन्न लागत को लेकर चिंतित हैं, जिसका असर अंततः समाज पर ही पड़ेगा। (10) जल्दबाजी में क्रियान्वयन से अनुकूलन की कमी: आलोचकों का मानना है किE20 को तेज़ी से लागू करने के चलते सरकार ने उपभोक्ताओं और उद्योग को समुचित ढालने का वक्त नहीं दिया। ब्राज़ील ने जहां आधी सदी लगा दी एक स्थायी एथेनॉल मॉडल विकसित करने में, भारत में कुछ ही वर्षों में लक्ष्य हासिल करने की होड़ रही। इस जल्दीबाज़ी का परिणाम यह है कि न तो वाहन निर्माता शुरू में पूरी तरह तैयार थे और न ही सर्विस नेटवर्क प्रशिक्षित था। सरकार ने चरणबद्ध ढंग से, पायलट प्रोजेक्ट के जरिए या क्षेत्रवार परीक्षण के बिना ही पूरे देश में E20 लागू कर दिया। ब्राज़ील की तरह अगर धीरे-धीरे ब्लेंड बढ़ाया जाता और पुराने-नई गाड़ियों के लिए समानांतर ईंधन विकल्प रखे जाते, तो शायद उपभोक्ताओं में इतना डर न होता। वर्तमान परिदृश्य में, जल्दबाजी में संक्रमण (transition) करने से आम जनता को ही ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है – वाहन मरम्मत, माइलेज नुकसान और आत्मविश्वास की कमी के रूप में।एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति का सीधा असर भारत के मध्यमवर्गीय वाहन मालिकों की जेब और उनकी गाड़ियों की सेहत पर पड़ रहा है। सरकार ने पर्यावरण सुधार और विदेशी तेल आयात कम करने के बड़े वादे करते हुए इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है, लेकिन उपरोक्त चुनौतियों ने लोगों में डर और नाराज़गी दोनों भर दी है। कई उपभोक्ता महसूस कर रहे हैं कि उनसे बिना पूछे उनके वाहन और बजट के साथ प्रयोग किया जा रहा है। यदि समय रहते इन चिंताओं का समाधान नहीं किया गया – जैसे उपभोक्ताओं को ईंधन का विकल्प देना, कीमतों में राहत या वाहन अनुकूलन में मदद – तो जनता का भरोसा टूट सकता है और यह हरित पहल सामाजिक असंतोष पैदा कर सकती है।
सरकार publicly कह रही है कि सभी आवश्यक शोध और इंतज़ाम किए जा चुके हैं और अधिकांश नए वाहन E20 के अनुरूप हैं। वह यह भी जोर देकर कह रही है कि एथेनॉल मिश्रण से लंबी अवधि में देश का फायदा होगा और किसानों को नया बाज़ार मिलेगा। लेकिन जब तक ज़मीनी स्तर पर उपभोक्ता खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते, तब तक इस नीति की सफलता संदिग्ध रहेगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को ब्राज़ील के मॉडल से सीख लेते हुए उपभोक्ता हितैषी कदम उठाने चाहिए – जैसे स्पष्ट विकल्प प्रदान करना, पुराने वाहनों के लिए उचित व्यवस्थाएं, पूरी पारदर्शिता, और समर्थनात्मक वाहन सेवा अभियान।
तभी एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर फैला डर कम होगा और यह सचमुच आम जन के लिए फायदे का सौदा बन पाएगा। फिलहाल, बढ़ती कीमतों और गाड़ियों को नुकसान की आशंकाओं के बीच आम आदमी यही पूछ रहा है – क्या एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल वाकई “सस्ता, स्वच्छ ईंधन” है या फिर मेरी जेब और इंजन पर पड़ने वाला एक नई मुसीबत का बोझ ? India News In Hindi