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Petrol Diesel Prices : पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में शुक्रवार को तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई> सीएनजी की क़ीमत में भी दो रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है।

Petrol Diesel Prices Hike : पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ते ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है जबकि सत्ता और उसके समर्थक कीमतों में वृद्धि को जायज ठहराने के लिए नए-नए तर्क गढ़ रहे हैं। इस सब के बीच आम आदमी समझ गया है कि उसके लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सुबह से ही लोग इस केलकुलेशन में लग गए हैं मंहगाई स्ट्राइक का उनकी जिंदगी पर कितना असर होने वाला है।
पीटीआई के मुताबिक दिल्ली के जनपथ फ्यूल पंप पर मौजूद एक ग्राहक ने कहा, "भारत सरकार ने पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी हैं... पहले से ही महंगाई ज्यादा है और अब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद... मुझे नहीं पता कि हम कैसे गुज़ारा करेंगे। अब हर चीज के दाम बढ़ जाएंगे। सरकार को किसी न किसी स्तर पर इसे संभालना चाहिए।"
वहां मौजूद अमरिक सिंह भाटिया ने कहा, "पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद दूसरी चीज़ों के दाम भी बढ़ जाएंगे। ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाएगा। अभी युद्ध चल रहा है... पूरी दुनिया में कीमतें बढ़ रही हैं। यहाँ के लोग भी इसका असर झेल रहे हैं।"
‘बहुत बड़ा असर पड़ेगा’
जबलपुर, मध्य प्रदेश की एक कंज्यूमर शिल्पी सिंह ने कहा, "इसका बहुत बड़ा असर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, मैं कॉलेज जाती हूं, मुझे लगभग 7-8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आप हमेशा समय पर नहीं पहुंच सकते, इसलिए आपको अपने वाहन का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। मैं इसका असर अपने घरों में भी साफ-साफ देख सकती हूं। मुझे लगता है कि निम्न वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लोग ही इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।"
‘पेट्रोल बहुत जरुरी है, कोई और चारा नहीं’
मुंबई के एक फ्यूल स्टेशन पर पेट्रोल भरवाने आए एक कस्टमर ने कहा, "पेट्रोल पहले से ही 103 रुपये था, जो हमारे लिए मुश्किल था। अब यह 3.13 रुपये बढ़ गया है, जिससे हालात और भी मुश्किल हो गए हैं। सैलरी नहीं बढ़ रही है, लेकिन खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। मेरे दो बच्चे हैं, मुझे काम के लिए और अपने परिवार को घुमाने-फिराने के लिए रोजाना पेट्रोल की ज़रूरत पड़ती है। प्रत्येक दिन 2 लीटर भी इस्तेमाल करने का मतलब है, हर महीने 200 से 400 रुपये का अतिरिक्त खर्च। काम और परिवार की जरुरतों के लिए पेट्रोल बहुत जरुरी है, इसलिए हमारे पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं, लेकिन यह गलत है।"
‘वैश्विक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा’
कोलकाता में अमित उपाध्याय कहते हैं, "लोगों को निश्चित रूप से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन हमें मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और वैश्विक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा। कहीं न कहीं, हमारा देश भी—हर दूसरे देश की तरह—अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर निर्भर है। मुझे उम्मीद है कि बंगाल में राजनीतिक बदलाव और नई सरकार के आने के बाद, जब यह स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी, तो हमारी उनसे यही गुज़ारिश होगी कि कृपया वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और इसे नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी कदम उठाएं, ताकि आम लोगों और जनता को इसकी वजह से लगातार तकलीफ़ न उठानी पड़े।"
पंजाब के होशियारपुर पेट्रोल पंप पर मौजूद एक शख्स ने कहा, "डीज़ल की कीमत में 3 रुपये की बढ़ोतरी की गई है; इसका नतीजा यह होगा कि हर चीज़ की कीमत बढ़ जाएगी, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाएगा। युद्ध चल रहा है और अब इसका असर हम पर भी पड़ा है। सरकार ने कीमतें बढ़ा दी हैं... अब 'आम आदमी' गुज़ारा कैसे करेगा? युद्ध तो चल ही रहा है, लेकिन सरकार को फ़्यूल की कीमतें बढ़ाने के बजाय कोई और कदम उठाना चाहिए था।"
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