
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। कभी सियासत के मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट रहे पीके अब खुद मैदान में उतरकर जीत का गणित साधने में जुट गए हैं। मोतिहारी में आयोजित सभा में उन्होंने साफ संकेत दिया कि उनकी नई पार्टी जन सुराज इस बार सिर्फ तमाशबीन बनने नहीं आई है, बल्कि नीतीश कुमार और बीजेपी को सीधी चुनौती देने का इरादा रखती है। पीके ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय का साथ मिलने पर जन सुराज बिहार की सत्ता में बड़ा उलटफेर करेगी और 2027 में उत्तर प्रदेश की राजनीति तक भूचाल ला सकती है। Prashant Kishore
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर प्रशांत किशोर का राजनीतिक तेवर अब खुलकर सामने आ गया है। मोतिहारी की सभा में उन्होंने मुसलमानों से समर्थन की खुली अपील करते हुए बड़ा दावा किया कि अगर 40% हिंदू और 20% मुसलमान साथ आ जाएं, तो जन सुराज की जीत सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दो साल बाद उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार को भी चुनौती दी जा सकती है। पीके का यह बयान बताता है कि वे इस बार सत्ता का खेल जमीनी स्तर पर धार्मिक-सामाजिक समीकरणों के जरिए खेलने की तैयारी में हैं।
कभी नीतीश कुमार की राजनीति के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर अब उनके सबसे बड़े आलोचक बन चुके हैं। 2015 में नीतीश की सत्ता वापसी की पटकथा लिखने वाले पीके आज 'बिहार बदलाव यात्रा' के जरिए खुद मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। उनका अभियान हिंदू-मुस्लिम एकता और जनसंपर्क पर केंद्रित है, ताकि भीड़भाड़ वाली बिहार की राजनीति में जन सुराज को तीसरे विकल्प के रूप में खड़ा किया जा सके।
पीके लगातार नीतीश कुमार को निशाने पर ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि "मुख्यमंत्री अब शासन चलाने की स्थिति में नहीं हैं। उनकी उम्र हो चुकी है, इसलिए बिहार को नीतीश से आगे देखना होगा।" एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के बीच की पारंपरिक लड़ाई में पीके तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का दांव साफ है मुस्लिम समर्थन के जरिए हिंदू-मुस्लिम एकता की राजनीति को हथियार बनाकर हिंदी पट्टी में बीजेपी को चुनौती देना। लेकिन यह रणनीति कितनी कारगर होगी, इसका फैसला आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में होगा, जहां उनकी पार्टी पहली बार असली राजनीतिक परीक्षा से गुजरेगी। Prashant Kishore