
Veer Savarkar : देश आज महान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उनके साहस और समर्पण को याद कर सलाम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर सावरकर को ‘भारत माता का सच्चा सपूत’ बताते हुए उनके अपार संघर्ष और अदम्य साहस को सम्मानित किया। मोदी ने कहा कि सावरकर की कहानी भारत की आज़ादी की गाथा में एक ऐसी अमिट मिसाल है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
सावरकर न केवल महाराष्ट्र के नासिक के बेटे थे, बल्कि भारत के उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जुझारू लड़ाई लड़ी। उनका जीवन संघर्ष, साहस और विचारों की ताकत का जीवंत उदाहरण रहा। अंग्रेजों ने उनके क्रांतिकारी हौसले को दबाने के लिए उन्हें काला पानी की सजा दी — अंडमान की सेलुलर जेल में कैद किया गया। फिर भी, सावरकर ने कभी हार नहीं मानी और अपनी कविता और विचारों के माध्यम से स्वतंत्रता की मशाल जलाए रखी।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट में लिखा - भारत माता के सच्चे सपूत वीर सावरकर जी को उनकी जन्म-जयंती पर आदरपूर्वक नमन। विदेशी हुकूमत की सख्त यातनाएं भी उनके मातृभूमि प्रेम को कमजोर नहीं कर सकीं। उनके साहस और संघर्ष की गाथा हमेशा देशवासियों के दिलों में जीवित रहेगी। उनका त्याग विकसित भारत के निर्माण में भी मार्गदर्शक बनेगा।
28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक में जन्मे विनायक दामोदर सावरकर ने कम उम्र से ही देशभक्ति की मशाल जलाना शुरू कर दी थी। अपने युवा दिनों में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह का बीज बोया और सशस्त्र क्रांति के रास्ते पर कदम बढ़ाया। विदेशों में, खासकर लंदन में, उन्होंने ‘अभिनव भारत’ और ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ जैसे संगठन बनाकर भारतीय युवाओं में आज़ादी की लौ जगाई और देशभक्ति का संचार किया।
1910 में अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार किया और अगले वर्ष दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाकर अंडमान की कुख्यात काला पानी जेल भेज दिया। जेल की कठोर यातनाओं और कठोर परिस्थितियों के बीच भी सावरकर का जज्बा कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने जेल की दीवारों पर देशभक्ति से ओत-प्रोत कविताएं लिखीं, जो आज भी स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला को प्रज्वलित करती हैं। Veer Savarkar