
PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महावीर जयंती के पावन अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नवकार महामंत्र दिवस’ कार्यक्रम में भाग लेकर जैन धर्म के प्रति अपनी गहरी आस्था का प्रदर्शन किया। इस विशेष आयोजन में प्रधानमंत्री न केवल बिना जूते पहने पहुँचे, बल्कि उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के साथ सामान्य जन के बीच बैठकर नवकार महामंत्र का जाप किया। उनकी यह सादगीपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने नवकार महामंत्र की दिव्यता और इसकी शांति प्रदान करने वाली शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंत्र न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अहिंसा, करुणा और आत्म-शुद्धि की भावना को भी जागृत करता है। दुनिया के 108 देशों से जुड़े श्रद्धालु इस आयोजन से वर्चुअल और भौतिक रूप से जुड़े, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जैन धर्म भारत की आत्मा और आध्यात्मिकता की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि देश का नया संसद भवन भी इस समृद्ध परंपरा से अछूता नहीं है—वहां तीर्थंकरों की मूर्तियों और शिक्षाओं के माध्यम से जैन संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
पीएम मोदी ने अनेकांतवाद के सिद्धांत को आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रभावशाली विचारधारा बताया। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत विविध दृष्टिकोणों को अपनाने और सहिष्णुता को बढ़ावा देता है—जो वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार जैन साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु गंभीर प्रयास कर रही है। इसमें पाली और प्राकृत भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने और प्राचीन ग्रंथों का डिजिटलीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों और देशवासियों से नौ संकल्प लेने का अनुरोध किया, जिनमें शामिल हैं:
जल संरक्षण
माँ की याद में एक पेड़ लगाना
स्वच्छता को अपनाना
स्थानीय उत्पादों का समर्थन
भारत भ्रमण
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना
मोटे अनाजों का सेवन
खाद्य तेल की खपत में कमी
गरीबों की मदद
खेल और योग को दिनचर्या में शामिल करना
प्रधानमंत्री ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि "भारत माता की जय" बोलने वाले हर व्यक्ति को गले लगाएं और एकता का संदेश फैलाएं। PM Modi :