
मणिपुर की नफरत और टकराव की धुंध में अब उम्मीद की रौशनी झलकने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को जब दो साल बाद इस अशांत राज्य की धरती पर कदम रखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके आगमन को लेकर राज्य भर में नई उम्मीदों का माहौल है। लंबे समय से हिंसा और अविश्वास से जूझते इस उत्तर-पूर्वी प्रदेश को अब केंद्र सरकार की सीधी तवज्जो मिल रही है। मोदी का यह दौरा सिर्फ उपस्थिति नहीं, बल्कि शांति और भरोसे का पैगाम माना जा रहा है। इसके बाद प्रधानमंत्री राज्य को 8,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे, जो अशांत मणिपुर के लिए नयी शुरुआत का प्रतीक साबित हो सकती है। PM Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा उस समय हो रहा है, जब दो साल पहले भड़की जातीय हिंसा ने मणिपुर को गहरे जख्म दिए थे। प्रधानमंत्री चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड से 7,300 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे—यह इलाका कुकी बहुल है। वहीं इंफाल, जो मैतेई समुदाय का गढ़ है, वहां 1,200 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया जाएगा। मोदी का यह संतुलित कदम दोनों समुदायों के बीच पुल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मई 2023 से भड़की कुकी-मैतेई हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान गई और हजारों परिवार उजड़ गए। प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। अब जबकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है और मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को पद छोड़ना पड़ा, मोदी का यह दौरा खास राजनीतिक संदेश भी देता है।
चार सितंबर को केंद्र सरकार ने कुकी उग्रवादी गुटों के साथ त्रिपक्षीय समझौता कर 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' (युद्धविराम) को बहाल किया। इस एग्रीमेंट में नेशनल हाईवे-2 को खोलने की सहमति बनी, जिसे मणिपुर की जीवनरेखा माना जाता है। समझौते के तहत एक साल तक सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय भी लिया गया है। हालांकि, इसी बीच एक आदिवासी नेता की हत्या ने सरकार की कोशिशों पर सवाल भी खड़े किए। राज्यसभा सांसद लेइशेम्बा सनाजाओबा ने प्रधानमंत्री के दौरे को “ऐतिहासिक अवसर” बताया और कहा कि पहली बार कोई पीएम ऐसे कठिन दौर में सीधे जनता का दर्द सुनने आ रहा है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि मोदी को यह कदम बहुत पहले उठाना चाहिए था। राजनीतिक हलकों में सवाल यह भी है कि क्या विकास की घोषणाएं वाकई टूटे भरोसे को जोड़ पाएंगी।
समझौते की सबसे अहम शर्त राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखना है। यह कदम कुकी संगठनों की अलग प्रशासन की मांग से दूरी का संकेत देता है। हालांकि, कुकी-जो काउंसिल (KZC) अब भी राजनीतिक समाधान की उम्मीद जता रही है। ऐसे में मोदी का यह दौरा केवल आर्थिक पैकेज नहीं, बल्कि दोनों समुदायों के बीच विश्वास की कड़ी कसौटी भी बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा निश्चित ही विकास और शांति का साझा संदेश लेकर आया है। लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या यह पैकेज और समझौते मणिपुर की गहरी दरारों को भर पाएंगे? फिलहाल, लोगों की उम्मीदें जुड़ी हैं कि शायद यह यात्रा मणिपुर को लंबे समय से इंतजार कर रहे शांति के नए सवेरे की राह दिखा सके। PM Modi