राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए घटनाक्रम पर मायावती ने ममता को आइना दिखाया

मायावती ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज से आती हैं और इसलिए उनका सम्मान सभी को करना चाहिए।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Mar 2026 04:39 PM
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President's Visit to Bengal : बसपा सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज से आती हैं और इसलिए उनका सम्मान सभी को करना चाहिए। मायावती ने कहा कि राष्ट्रपति जैसे पद के साथ कोई भी अशोभनीय घटना नहीं होनी चाहिए। उनके दौरे के दौरान पूरे प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।

संवैधानिक पदों का राजनीतिकरण उचित नहीं 

मायावती ने कहा कि संवैधानिक पदों का राजनीतिकरण उचित नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए लोकसभा अध्यक्ष के हालिया राजनीतिकरण की भी आलोचना की और सभी से आग्रह किया कि वे संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखें। उनका मानना है कि संसद का नया सत्र देश और जनहित में बिना किसी राजनीतिक रंगरेजी के चलना चाहिए।

पूरे घटनाक्रम को मायावती ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया

राष्ट्रपति के दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य मंत्री कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित नहीं हुए, और अचानक कार्यक्रम स्थल बदलने की वजह से भी राष्ट्रपति ने नाराजगी जताई। इस पूरे घटनाक्रम को मायावती ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इस बयान के जरिए मायावती ने स्पष्ट संदेश दिया कि संवैधानिक पदों का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है और किसी भी स्थिति में राजनीतिक विरोध या व्यक्तिगत मतभेद के कारण उनकी गरिमा को ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए। President's Visit to Bengal


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बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन! जल्द लागू होगा नया नियम

बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य, उनकी सुरक्षा और ऑनलाइन आदतों को देखते हुए भारत सरकार और कुछ राज्य सरकारें सोशल मीडिया पर बच्चों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नए कदम उठा रही हैं। जल्द ही इसके लिए नए कानून और नियम लागू किए जा सकते हैं।

Social Media
सोशल मीडिया नियम
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Mar 2026 12:56 PM
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आजकल बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत जल्दी जुड़ जाते हैं। हालांकि यह उन्हें जानकारी और मनोरंजन के नए अवसर देता है लेकिन विशेषज्ञों और सरकार की नजर में इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं। बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य, उनकी सुरक्षा और ऑनलाइन आदतों को देखते हुए भारत सरकार और कुछ राज्य सरकारें सोशल मीडिया पर बच्चों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नए कदम उठा रही हैं। जल्द ही इसके लिए नए कानून और नियम लागू किए जा सकते हैं।

उम्र के हिसाब से तय होंगे नियम

केंद्र सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह बैन करने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय एक ग्रेडेड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर विचार किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए अलग-अलग नियम तय किए जाएंगे। प्रस्तावित योजना के अनुसार बच्चों को तीन आयु वर्गों में बांटा गया है: 8 से 12 साल, 12 से 16 साल, और 16 से 18 साल। सबसे छोटे बच्चों के लिए सबसे कड़े नियम होंगे जबकि बड़े किशोरों के लिए नियम थोड़े ढीले रहेंगे।

हो सकती है नाइट कर्फ्यू की व्यवस्था

समय और पहुंच पर पाबंदी सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा। नए कानून के तहत तय किया जा सकता है कि बच्चे दिन में कितने घंटे सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा नाइट कर्फ्यू की व्यवस्था भी हो सकती है जिससे बच्चे रात के समय प्लेटफॉर्म पर लॉग-इन न कर सकें। पेरेंटल कंसेंट भी अनिवार्य बनाया जा सकता है यानी नाबालिगों के अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी।

कंपनियों को भी नए सुरक्षा फीचर्स लगाना होंगे

सोशल मीडिया कंपनियों को भी नए सुरक्षा फीचर्स लगाना होंगे। इसका मकसद होगा कि प्लेटफॉर्म बच्चों की उम्र की पहचान कर सके और उनके लिए उपयुक्त कंटेंट ही दिखाए। यह कदम डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारें पहले ही इस दिशा में कदम उठा रही हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-27 के बजट में घोषणा की कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अगले 90 दिनों में 13 या 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचार करने का संकेत दिया।

पाबंदियों पर उठाए गए सवाल

हालांकि, बड़ी तकनीकी कंपनियों और डिजिटल अधिकार संगठनों ने इन पाबंदियों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू करना मुश्किल होगा। इसके अलावा, बैन की वजह से बच्चे सुरक्षित प्लेटफॉर्म छोड़कर अनरेगुलेटेड साइट्स की ओर भी जा सकते हैं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन का मानना है कि केवल बैन लगाने से समस्या हल नहीं होगी। इसके बजाय प्लेटफॉर्म के डिजाइन, डेटा सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान देना ज्यादा प्रभावी होगा।

दुनियाभर में बढ़ रहा है सोशल मीडिया बैन का चलन

दुनिया भर में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का चलन बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लागू है। फ्रांस और ग्रीस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर रोक है। इंडोनेशिया में 28 मार्च से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर अकाउंट बनाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। भारत भी इस वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा बन रहा है और जल्द ही अपने नियमों के साथ इसे लागू करने की तैयारी में है।

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भारतीय राजनीति की 8 ऐसी महिलाएं जिन्होंने पुरुषों को भी छोड़ा पीछे, एक तो रह चुकी हैं PM

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Women Leaders in Indian Politics
Top Women Leaders in Indian Politics
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Mar 2026 02:12 AM
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भारतीय राजनीति को अक्सर पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन समय-समय पर कई महिलाओं ने इस सोच को बदलकर रख दिया। मुश्किल परिस्थितियों, सामाजिक चुनौतियों और राजनीतिक संघर्षों के बीच इन महिलाओं ने ऐसा मुकाम हासिल किया जिसने पूरे देश को प्रेरित किया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर यह याद करना जरूरी है कि भारत की राजनीति में कई ऐसी महिला नेता रही हैं जिन्होंने न सिर्फ सत्ता के सर्वोच्च पदों तक पहुंच बनाई बल्कि अपने फैसलों और कामों से देश की दिशा भी बदल दी। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक इन नेताओं ने साबित किया कि नेतृत्व क्षमता किसी लिंग की मोहताज नहीं होती। आइए जानते हैं ऐसी ही आठ महिलाओं की कहानी जिन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।

स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने वाली राजकुमारी अमृत कौर

Rajkumari Amrit Kaur स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं और उन्होंने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। कपूरथला के शाही परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने आरामदायक जीवन छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और Mahatma Gandhi के साथ मिलकर काम किया। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनका सबसे बड़ा योगदान दिल्ली में All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) की स्थापना रहा। उन्होंने न केवल सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया बल्कि विदेशों से भी सहयोग जुटाया ताकि भारत को एक विश्वस्तरीय मेडिकल संस्थान मिल सके। इसके अलावा उन्होंने चेचक और मलेरिया जैसी बीमारियों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए और महिलाओं के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई।

सुचेता कृपलानी: देश की पहली महिला मुख्यमंत्री

Sucheta Kriplani भारतीय राजनीति की एक साहसी और ईमानदार नेता थीं। 1963 में वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और इस तरह किसी भी भारतीय राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने भूमिगत रहकर काम किया और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासन में अनुशासन और पारदर्शिता लाने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में राज्य कर्मचारियों की बड़ी हड़ताल भी हुई जिसे उन्होंने संयम और दृढ़ता से संभाला।

इंदिरा गांधी: साहसिक फैसलों वाली प्रधानमंत्री

Indira Gandhi भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक मानी जाती हैं। वह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और अपने मजबूत फैसलों के कारण “आयरन लेडी” के नाम से भी जानी गईं। उनके कार्यकाल में 1969 में बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ, जिससे बैंकिंग सेवाएं आम लोगों तक पहुंच सकीं। उन्होंने हरित क्रांति को बढ़ावा दिया, जिससे भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में भारत ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और बांग्लादेश का निर्माण हुआ।

सुषमा स्वराज: जनता से जुड़ी हुई नेता

Sushma Swaraj भारतीय राजनीति की सबसे लोकप्रिय और सम्मानित नेताओं में से एक थीं। वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और बाद में देश की विदेश मंत्री भी रहीं। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद की। चाहे पासपोर्ट की समस्या हो या युद्धग्रस्त इलाकों से लोगों को निकालना उन्होंने हर बार तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनकी संवेदनशीलता और शानदार भाषण शैली ने उन्हें देश की सबसे पसंदीदा नेताओं में शामिल कर दिया।

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मायावती: सामाजिक बदलाव की मजबूत आवाज

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जयललिता: “अम्मा” की लोकप्रिय राजनीति

J. Jayalalithaa तमिलनाडु की राजनीति का बेहद मजबूत चेहरा थीं। उनके समर्थक उन्हें “अम्मा” कहकर पुकारते थे। उन्होंने राज्य में कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं जो आम लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी थीं। “अम्मा कैंटीन”, सस्ती दवाएं और गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उनके नेतृत्व में तमिलनाडु ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की।

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