कैसे पहुंचा 'स्टार ऑफ अफ्रीका' ब्रिटिश ताज तक? जानिए पूरी कहानी
दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया स्थित प्रीमियर खदान में नियमित निरीक्षण के दौरान खदान सुप्रिटेंडेंट फ्रेडरिक वेल्स को यह अनमोल रत्न मिला था। फ्रेडरिक धरती की सतह से 18 फीट नीचे थे, तभी उन्होंने अपने ठीक ऊपर दीवार पर तारों की तरह चमकती रोशनी देखी।

The world's largest diamond: इतिहास में आज का दिन बहुत खास है। 25 जनवरी 1905 को दुनिया को एक ऐसे रत्न से सुसज्जित किया गया, जिसकी शान आज भक्क बनी हुई है। दक्षिण अफ्रीका की एक खदान से उस समय दुनिया का सबसे बड़ा हीरा निकाला गया, जिसका नाम 'कलिनन' रखा गया। यह हीरा अपनी अद्भुत सुंदरता और आकार के लिए आज भी विश्वभर में मशहूर है।
कैसे मिला ये शानदार हीरा?
दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया स्थित प्रीमियर खदान में नियमित निरीक्षण के दौरान खदान सुप्रिटेंडेंट फ्रेडरिक वेल्स को यह अनमोल रत्न मिला था। फ्रेडरिक धरती की सतह से 18 फीट नीचे थे, तभी उन्होंने अपने ठीक ऊपर दीवार पर तारों की तरह चमकती रोशनी देखी। यह चमक उन्हें भाईचारा कर रही थी, जो बाद में दुनिया का सबसे बड़ा हीरा साबित हुआ।
3106 कैरेट का था वजन
यह हीरा 3106 कैरेट का था और इसका वजन 1.33 पाउंड (लगभग 621 ग्राम) था। इस शानदार खोज की सूचना तुरंत खदान के मालिक सर थॉमस कलिनन को दी गई, जिनके नाम पर बाद में इस हीरे का नाम 'कलिनन' रखा गया। हालांकि, कुछ सूत्रों का दावा है कि इसे 26 जनवरी को बाहर निकाला गया था, लेकिन 25 जनवरी को ही इसकी खोज का दिन माना जाता है।
ब्रिटेन के राजा को मिला तोहफा
हीरे की खोज के बाद इसे ट्रांसवाल प्रांत की सरकार ने खरीद लिया। इसके बाद इसे ब्रिटेन के राजा एडवर्ड सप्तम को जन्मदिन के उपहार के रूप में भेंट किया गया। लेकिन इस अनमोल हीरे को अफ्रीका से लंदन तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी।
जासूसों से भरे जहाज से भेजा गया नकली हीरा
राजा एडवर्ड को हीरे की सुरक्षा लेकर गंभीर चिंता थी। उन्हें डर था कि अफ्रीका से लंदन ले जाते समय यह हीरा चोरी हो सकता है। इसलिए एक चतुर योजना बनाई गई। ध्यान भटकाने के लिए जासूसों से भरे एक स्टीमर जहाज पर एक नकली हीरा भेजा गया, ताकि सभी की निगाहें उस पर टिकी रहें। वहीं, असली हीरे को एक साधारण बक्से में पैक करके चुपके से इंग्लैंड भेज दिया गया।
काटने वाला बेहोश हो गया था
एडवर्ड ने इस विशाल हीरे को काटने की जिम्मेदारी एम्स्टर्डम की एस्चर डायमंड कंपनी के प्रमुख जोसेफ एस्चर को सौंपी। जोसेफ ने इसे काटने से पहले छह महीने तक इसका गहन अध्ययन किया। पहले प्रयास में स्टील का ब्लेड टूट गया, लेकिन हीरे पर कोई खरोंच तक नहीं आई। दूसरे प्रयास में, हीरा योजना के अनुसार टूट गया। कहा जाता है कि इतने बड़े जोखिम भरे काम के बाद जोसेफ एस्चर मानसिक थकावट के कारण बेहोश हो गए थे।
अब कहां है यह हीरा?
बाद में कलिनन को 9 बड़े और लगभग 100 छोटे पत्थरों में तराशा गया। इनकी कुल कीमत करोड़ों डॉलर है।
- स्टार ऑफ अफ्रीका I (कलिनन I): यह 530 कैरेट का है और दुनिया का सबसे बड़ा रंगहीन हीरा है। यह ब्रिटिश सम्राट के शाही राजदंड (Sovereign's Sceptre) में जड़ा हुआ है।
- स्टार ऑफ अफ्रीका II (कलिनन II): यह 317 कैरेट का है और शाही मुकुट (Imperial State Crown) में सुशोभित है।
- कलिनन III: यह ब्रिटेन के अन्य राजसी रत्नों के साथ लंदन टावर में सुरक्षित है।
आज भी ये हीरे ब्रिटिश राजशाही के गौरव का प्रतीक माने जाते हैं और लंदन टावर में दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। The world's largest diamond
The world's largest diamond: इतिहास में आज का दिन बहुत खास है। 25 जनवरी 1905 को दुनिया को एक ऐसे रत्न से सुसज्जित किया गया, जिसकी शान आज भक्क बनी हुई है। दक्षिण अफ्रीका की एक खदान से उस समय दुनिया का सबसे बड़ा हीरा निकाला गया, जिसका नाम 'कलिनन' रखा गया। यह हीरा अपनी अद्भुत सुंदरता और आकार के लिए आज भी विश्वभर में मशहूर है।
कैसे मिला ये शानदार हीरा?
दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया स्थित प्रीमियर खदान में नियमित निरीक्षण के दौरान खदान सुप्रिटेंडेंट फ्रेडरिक वेल्स को यह अनमोल रत्न मिला था। फ्रेडरिक धरती की सतह से 18 फीट नीचे थे, तभी उन्होंने अपने ठीक ऊपर दीवार पर तारों की तरह चमकती रोशनी देखी। यह चमक उन्हें भाईचारा कर रही थी, जो बाद में दुनिया का सबसे बड़ा हीरा साबित हुआ।
3106 कैरेट का था वजन
यह हीरा 3106 कैरेट का था और इसका वजन 1.33 पाउंड (लगभग 621 ग्राम) था। इस शानदार खोज की सूचना तुरंत खदान के मालिक सर थॉमस कलिनन को दी गई, जिनके नाम पर बाद में इस हीरे का नाम 'कलिनन' रखा गया। हालांकि, कुछ सूत्रों का दावा है कि इसे 26 जनवरी को बाहर निकाला गया था, लेकिन 25 जनवरी को ही इसकी खोज का दिन माना जाता है।
ब्रिटेन के राजा को मिला तोहफा
हीरे की खोज के बाद इसे ट्रांसवाल प्रांत की सरकार ने खरीद लिया। इसके बाद इसे ब्रिटेन के राजा एडवर्ड सप्तम को जन्मदिन के उपहार के रूप में भेंट किया गया। लेकिन इस अनमोल हीरे को अफ्रीका से लंदन तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी।
जासूसों से भरे जहाज से भेजा गया नकली हीरा
राजा एडवर्ड को हीरे की सुरक्षा लेकर गंभीर चिंता थी। उन्हें डर था कि अफ्रीका से लंदन ले जाते समय यह हीरा चोरी हो सकता है। इसलिए एक चतुर योजना बनाई गई। ध्यान भटकाने के लिए जासूसों से भरे एक स्टीमर जहाज पर एक नकली हीरा भेजा गया, ताकि सभी की निगाहें उस पर टिकी रहें। वहीं, असली हीरे को एक साधारण बक्से में पैक करके चुपके से इंग्लैंड भेज दिया गया।
काटने वाला बेहोश हो गया था
एडवर्ड ने इस विशाल हीरे को काटने की जिम्मेदारी एम्स्टर्डम की एस्चर डायमंड कंपनी के प्रमुख जोसेफ एस्चर को सौंपी। जोसेफ ने इसे काटने से पहले छह महीने तक इसका गहन अध्ययन किया। पहले प्रयास में स्टील का ब्लेड टूट गया, लेकिन हीरे पर कोई खरोंच तक नहीं आई। दूसरे प्रयास में, हीरा योजना के अनुसार टूट गया। कहा जाता है कि इतने बड़े जोखिम भरे काम के बाद जोसेफ एस्चर मानसिक थकावट के कारण बेहोश हो गए थे।
अब कहां है यह हीरा?
बाद में कलिनन को 9 बड़े और लगभग 100 छोटे पत्थरों में तराशा गया। इनकी कुल कीमत करोड़ों डॉलर है।
- स्टार ऑफ अफ्रीका I (कलिनन I): यह 530 कैरेट का है और दुनिया का सबसे बड़ा रंगहीन हीरा है। यह ब्रिटिश सम्राट के शाही राजदंड (Sovereign's Sceptre) में जड़ा हुआ है।
- स्टार ऑफ अफ्रीका II (कलिनन II): यह 317 कैरेट का है और शाही मुकुट (Imperial State Crown) में सुशोभित है।
- कलिनन III: यह ब्रिटेन के अन्य राजसी रत्नों के साथ लंदन टावर में सुरक्षित है।
आज भी ये हीरे ब्रिटिश राजशाही के गौरव का प्रतीक माने जाते हैं और लंदन टावर में दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। The world's largest diamond












