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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही उठापटक लगातार गहराती दिखाई दे रही है। विधानसभा चुनाव में झटका लगने के बाद पार्टी के अंदर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।

Setback for TMC : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही उठापटक लगातार गहराती दिखाई दे रही है। विधानसभा चुनाव में झटका लगने के बाद पार्टी के अंदर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी बीच वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय का बागी खेमे के नेताओं के साथ दिल्ली में दिखाई देना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। दिल्ली में हुई एक अहम बैठक ने टीएमसी के भीतर संभावित नए समीकरणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। हालांकि अभी तक सुदीप बंद्योपाध्याय की ओर से किसी औपचारिक राजनीतिक फैसले की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उनकी मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Setback for TMC
टीएमसी के असंतुष्ट सांसदों का दावा है कि उन्हें लोकसभा में पार्टी के 19 सांसदों का समर्थन हासिल है। बागी खेमा लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अपनी ताकत दिखाने और अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग करने की तैयारी में है। हाल के दिनों में कई बागी सांसदों ने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसदों का दावा सही साबित होता है तो यह टीएमसी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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शनिवार को सुदीप बंद्योपाध्याय और सांसद शताब्दी रॉय के दिल्ली पहुंचने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई। दोनों नेताओं के एक साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचने की खबरों ने कई तरह की अटकलों को जन्म दिया। इससे पहले भी बागी सांसदों की ओर से दिल्ली में कई दौर की बैठकों की जानकारी सामने आ चुकी है। हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे टीएमसी के भीतर जारी सियासी संकट से जोड़कर देखा जा रहा है।
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सुदीप बंद्योपाध्याय लंबे समय तक लोकसभा में टीएमसी का प्रमुख चेहरा रहे हैं। संसदीय राजनीति में उनका अनुभव और पार्टी के भीतर उनकी वरिष्ठता उन्हें अहम नेताओं की श्रेणी में रखती है। हाल के वर्षों में संगठन और संसदीय नेतृत्व में हुए बदलावों के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर समय-समय पर चचार्एं होती रही हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर चल रही खींचतान ने कई वरिष्ठ नेताओं को असहज किया है।
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सूत्रों के अनुसार असंतुष्ट सांसद फिलहाल सीधे किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने के बजाय अलग संसदीय पहचान बनाने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वे संसद में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी नेतृत्व की नजर बनी हुई है और पार्टी के भीतर टूट को रोकने के प्रयास भी जारी बताए जा रहे हैं। टीएमसी की स्थापना से लेकर उसके विस्तार तक कई वरिष्ठ नेताओं ने ममता बनर्जी का साथ दिया है। ऐसे में यदि पार्टी के अनुभवी चेहरे असंतुष्ट खेमे के साथ जाते हैं तो इसका असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठनात्मक ढांचे पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन टीएमसी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। लोकसभा अध्यक्ष से प्रस्तावित मुलाकात और दिल्ली में होने वाली आगे की बैठकों के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह असंतोष दब जाएगा या फिर पार्टी के भीतर एक बड़े राजनीतिक बदलाव का रूप लेगा।
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