Political : जोखिम के बावजूद CM गहलोत ने निभाया वादा
Despite the risk, CM Gehlot kept his promise
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 07:26 AM
नई दिल्ली। इसमें कोई शक नहीं कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं। वह राजस्थान की सियासत के रग-रग से वाकिफ हैं। लेकिन, फिलहाल राज्य में उन्हें जुबान का पक्का कहा जा रहा है। राज्य में इस बात की चर्चा है कि गहलोत ने जनता से जो वादा किया था, उसे निभाया है। तमाम सियासी जोखिम के बावजूद उन्होंने आम आदमी को स्वास्थ्य का अधिकार, वकीलों की सुरक्षा के लिए कानून और नए जिलों के गठन के अपने वादे को पूरा कर दिया। माना जा रहा है कि सरकार के इन फैसलों का लाभ जरूरी मिलेगा।
इस वर्ष के अंत में राजस्थान विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्य में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक के बाद एक घोषणाएं कर कांग्रेस का कारवां आगे बढ़ा रहे हैं। दूसरी ओर अब पिछड़ी हुई नजर आ रही भाजपा भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। इसी क्रम में अगले कुछ दिनों में कई जांच एजेंसी राजस्थान में दस्तक दे देगी। इसी तरह महाराष्ट्र के एक स्वामी जी जो कथावाचक भी हैं और प्रदेश में सनातन धर्म के नाम पर भाजपा की अलख जगाने का काम शुरू कर चुके हैं। उनके आयोजित और प्रायोजित होने वाले सनातन कार्यक्रमों पर भाजपा की छाप दिखने लग गई है।
संकटमोचक
अवमानना वाले मामले में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता निरस्त होने के बाद कांग्रेस के सामने भाजपा को कड़ी चुनौती देने और उसका मुकाबला करने की महत्वपूर्ण चुनौती है। कांग्रेस में नेता तो बहुत से हैं, परंतु सरकार के खिलाफ कड़ा और सटीक बोलने की बड़ी चुनौती है। अशोक गहलोत को इस काम में दक्ष माना जाता है। वे लगातार भाजपा को चैलेंज कर रहे हैं। राजस्थान में इस वर्ष चुनाव होने हैं, इसलिए यहां भी उनके लिए बहुत काम है।
भाजपा ने चुनाव से आठ माह पूर्व संगठन में बड़ा फेरबदल कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष पद पर सांसद सीपी जोशी को लाया गया है। जबकि पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया की छुट्टी हो गई है। सतीश पूनिया को लगभग सभी नेता हटाना चाह रहे थे। सीपी जोशी कांग्रेस की पृष्ठभूमि के हैं। सबसे बड़ी बात तो यह कि वह सीएम के दावेदार भी नहीं है। इसलिए उनकी टांग खिंचाई तो नहीं होगी, परंतु इतने कम समय में वे क्या गुल खिला पाएंगे, यह देखने की बात होगी।
बड़े फेरबदल की तैयारी
राज्य में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी है। सरकार को नए बने जिलों में एसपी और कलेक्टर को एक अप्रैल से बैठाना है। दूसरी ओर पुराने जिलों में भी मजबूत व्यवस्था करनी है। माना जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या सूची में कम रहेगी, क्योंकि नए तीन संभाग में संभागीय आयुक्त और डीआईजी तैनात करने हैं। अप्रैल के बाद राज्य में बड़ा फेरबदल संभव हैं।
जनता भी कूदी
राइट टू हेल्थ बिल को लेकर प्रदेशभर के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। वे बिल को वापस करने की मांग कर रहे हैं, जबकि डॉक्टर पहले कुछ सुधार के बाद बिल लाने की बात कह रहे थे। सरकार ने ऐसा कर भी लिया था। सरकार के लिए अच्छी बात यह है कि आम जनता में इस बिल के समर्थन में है और बिल का विरोध करने वाले डॉक्टरों के सामाजिक बहिष्कार बात जनता सोशल मीडिया पर कर रही है। इस बात से डॉक्टर अचंभित हैं। आम जनता के दबाव के चलते डॉक्टर अब इस लड़ाई को जल्दी खत्म करने के मूड में आ गए हैं।
विदाई पर अटका
बजट सत्र के बाद माना जा रहा था कि राजनीतिक नियुक्तियों के साथ ही संगठन में पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। लेकिन, फिलहाल ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 15 अप्रैल तक कुछ नेता पार्टी को बाय-बाय कर सकते हैं। ऐसे हालात में मुख्यमंत्री और आलाकमान वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।
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