राष्ट्रीय ब्यूरो। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वैसे तो दबाव में फैसला न लेने के लिए जानी जाती है। लेकिन लखीमपुर खीरी मामले में वह बैकफुट है। माना जा रहा है कि किसान आंदोलन व विपक्ष के विरोध को थामने के लिए किसी भी समय केंद्रीय मंत्रिपरिषद से गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की छुट्टी हो सकती है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक,भाजपा हाईकमान अब टेनी का और ज्यादा बचाव करने के पक्ष में नहीं है। साथ ही उन्हें यह संकेत भी दिया जा रहा है कि अब गद्दी छोड़ दें। जिसे टेनी शायद समझ नहीं पा रहे हैं या समझना नहीं चाहते। बतादें कि उनके बेटे के साथ क्राइम ब्रांच की पुछताझ के दिन जिस तरह टेनी पार्टी आफिस में दिन भर बैठे रहे और समर्थक बेटे आशीष मिश्र के पक्ष में नारेबाजी करते रहे,इससे उनके प्रति हाईकमान की रही-सही सहानुभूति भी जाती रही।
सूत्र बताते हैं कि शीर्ष नेतृत्व की भृकुटि टेढ़ी हो गई है। इसका संकेत यह कहते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दे दिया कि अनुशासनहीनता के खिलाफ पार्टी किसी से भी समझौता नहीं करेगी। जो भी दोषी होगा,उसे सजा मिलेगा। रही-सही कसर उत्तरप्रदेश प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव ने पूरी कर दी। उन्होंने कहाकि नेतागिरी का मतलब फॉच्यूनर से कुचलना नहीं होता है। इस बीच गृह राज्यमंत्री टेनी को हटाने की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। टेनी के त्यागपत्र की मांग को लेकर तकरीबन सारे विपक्षी दल एक साथ आ गए हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी इसे सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया और वे लगातार हमलावर हैं। महाराष्ट्र में भी टेनी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद से बर्खास्तगी को लेकर आज महाअघाड़ी ने बंद का आयोजन कर रखा है। वहीं किसान संगठन भी अजय मिश्र टेनी के इस्तीफे से कम पर आंदोलन रोकने के लिए राजी नहीं हैं। ऐसे में भाजपा हाईकमान के रुख को देखते हुए संकेत साफ मिल रहे हैँ कि या तो टेनी खुद त्यागपत्र दे देगें अथवा उनकी बर्खास्तगी हो जाएगी।