Political News : कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा से गौतमबुद्ध नगर को जोड़ने की तैयारी
Rahul Gandhi
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 03:55 AM
Political News : Noida देश की राजनीति में कांग्रेस के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे राहुल गांधी और उनकी टीम की प्राथमिकताओं में दिल्ली से सटा हुआ उत्तर प्रदेश का गौतमबुद्ध नगर जनपद भी है। पार्टी यहां समर्पित कार्यकर्ताओं की तलाश कर रही है, जिन्हें केंद्रीय राजनीति में फिट किया जा सके। दक्षिण भारत से शुरू हुई कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को नोएडा से भी जोड़ने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिये जिले के कुछ नेताओं को राहुल गांधी के करीब लाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, नोएडा कांग्रेस की ही पैदाइश है। पार्टी के नवरत्नों में शुमार नारायण दत्त तिवारी ने नोएडा के सपनों को जमीन पर उतारा था। शायद यही कारण है कि कांग्रेस इसे फिर से अपने माफिक करने की कोशिश में जुटी है।
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वर्ष-1997 में उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित गाजियाबाद जिले से सटे हुए इलाके को गौतमबुद्धनगर जिले का नाम दिया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती का गृह क्षेत्र होने की वजह से साल 1997 के बाद ये इलाका हमेशा बसपा सरकार की प्राथमिकताओं में रहा। शायद इसीलिए यहां विकास की गंगा बही।
खास बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) भी इस इलाके के मुरीद हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि औद्योगिक नगरी में तब्दील हो चुके इस जिले के जेवर में एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है, वह साल, 2024 के लोकसभा चुनाव के मोदी के भाषणों में प्रासंगिक होगा। यहां शानदार फिल्म सिटी बनेगी। आज दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो, जिसकी औद्योगिक इकाइयां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस जिले में स्थापित ना हो।
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अगर राजनीतिक नजरिये से देखें तो यहां वर्ष-1952, 1957, 1962, 1971 और 1984 तक कांग्रेस का सांसद हुआ करता था, लेकिन साल-1996 के बाद लगातार यह भाजपा का अभेद दुर्ग बन चुका है। वर्ष-2008 में गौतमबुद्ध नगर संसदीय सीट का परिसीमन हुआ और यह लोकसभा सीट आरक्षित से सामान्य में तब्दील हुई। 2009 में लोकसभा हुए चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के सुरेंद्र सिंह नागर यहां से सांसद बने। साल-2014 में भाजपा ने डॉ. महेश शर्मा को एक बार फिर चुनाव मैदान में उतारा और वे प्रचंड बहुमत से अपना लोहा मनवाने में कामयाब हुए। वर्ष-2019 में डॉक्टर महेश शर्मा पहले से ज्यादा मार्जिन से सांसद बने। अब 2024 की तैयारी है।
वर्ष-2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां ऐसी शर्मिंदगी उठानी पड़ी कि उसका उम्मीदवार रमेश चंद तोमर रणछोड़ तोमर हो गया। चुनाव से ऐन पहले तोमर ने भाजपा का दामन थाम लिया। उसके बावजूद तकरीबन 27 हजार वोटरों ने कांग्रेस को वोट दिया। इससे पता चलता है कि इलाके में कांग्रेस की विचारधारा जिदा है।
इस इलाके से राहुल कनेक्शन पर यदि नजर डालें तो पता चलता है कि जब केंद्र में यूपीए-2 की सरकार थी, तब उत्तर प्रदेश मायावती के नीले रंग में रंगा हुआ था। इसी दौरान भट्टा पारसौल सहित क्षेत्र के एक दर्जन गावों के किसानों ने अपनी जमीन का उचित मुआवजा देने को लेकर आंदोलन खड़ा कर दिया। जिला प्रशासन और किसान आमने सामने आए। तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक अग्रवाल को अवांछनीय तत्वों ने गोली मार दी। वे घायल हो गए और स्थिति तनावपूर्ण बन गई। भट्टा पारसौल कांड देश की सरकार को हिलाने वाला था। अमेरिका के बड़े अखबारों में भी इस खबर का जिक्र हुआ। मायावती सरकार की किरकिरी हो रही थी। देश के तमाम बड़े नेता भट्टा पारसौल जाने पर अड़े हुए थे, लेकिन प्रदेश सरकार ने जिले की किलेबंदी कर दी। मुलायम सिंह यादव और शरद यादव जैसे नेता नोएडा के बॉर्डर से ही लौटा दिए गए थे। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी दिल्ली से निकले। हरियाणा के रास्ते तत्कालीन कांग्रेस प्रवक्ता और भाजपा के मौजूदा विधायक धीरेंद्र सिंह की बाइक पर सवार होकर भट्टा पारसौल पहुंचे।
मुद्दा बना और भट्टा पारसौल के किसानों के साथ मायावती ने समझौता किया
अब पार्टी के रणनीतिकार एक बार फिर इस इलाके में राहुल गांधी की उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति बना रहे हैं। कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से गौतमबुद्ध नगर को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी का स्वागत कैसे हो, किन-किन समर्पित कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी के करीब लाया जाए, इसका इसका खाका खींचने के संकेत मिले हैं। देखना दिलचस्प होगा कि सुस्त पड़ी कांग्रेस को गौतमबुद्ध नगर में कौन कौन खेवनहार मिलता है।